रांची: शारदीय नवरात्र का आज चौथे दिन है. आज के दिन मां दुर्गे के कूष्माण्डा स्वरूप की पूजा आराधना की जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां कूष्माण्डा की पूजा करने से आयु, यश, बल और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है, मां कुष्मांडा संसार को अनेक कष्टों और संकटों से मुक्ति दिलाती है.
मान्यता है कि जब इस सृष्टि का अस्तित्व नहीं था तब इन्हीं ने ब्रह्मांड की रचना की थी. यह सृष्टि की आदि-स्वरूपा हैं. मां कुष्माण्डा के शरीर में कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान है. इनके प्रकाश से ही दसों दिशाएं उज्जवलित हैं.
इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है. इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा मौजूद हैं. वहीं, आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों की जपमाला सुसज्जित है. मां कूष्माण्डा का वाहन सिंह है.

