दीपक,
रांची: प्रोजेक्ट भवन के ग्राउंड फ्लोर के कमरा नंबर 10 की अलग ही कहानी है. शायद ऐसी पटकथा पहली बार किसी अफसर ने लिखी है. पटकथा कुछ और नहीं यह निर्देश है भवन निर्माण विभाग के संयुक्त सचिव का. विभाग के लिए आवंटित कमरा संख्या 10 में एक ऐसा पोस्टर चिपकाया गया है, जिससे सभी संवेदक भयभीत हो गये हैं. दरवाजे पर यह कहा गया है कि जो भी संवेदक गलियारे में नजर आयेगा, उसे काली सूची में डाल दिया जायेगा. इससे संवेदकों में सरकार के प्रति काफी नाराजगी भी है. संवेदकों का कहना है कि जिन्होंने सरकार का ही काम किया, उसे भुगतान के लिए दौड़ाया जा रहा है. इसमें उनकी कहां गलती है.
भवन निर्माण विभाग के ठेकेदारों का हाल बेहाल
राज्य के भवन निर्माण विभाग से जुड़े ठेकेदारों का हाल बेहाल है. पिछले कई महीनों से उन्हें विभाग की तरफ से जॉब वर्क, रीपेयरिंग और अन्य काम के लिए भुगतान नहीं हो रहा है. सूत्रों के अनुसार पांच सौ से अधिक ऐसे ठेकेदारों को काफी दिक्कतों का सामना पड़ रहा है. पूजा के मौके में भी भुगतान नहीं होने से संवेदक और परेशानी झेल रहे हैं. जानकारी के अनुसार विधानसभा के नये भवन के लिए लगभग एक अरब रुपये ट्रांसफर किये जाने से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है. विधानसभा का नये भवन के लिए संवेदक कंपनी रामकृपाल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को काम पूरा करने के लिए भवन निर्माण विभाग की तरफ से पैसे दिये गये. नतीजतन भवन निर्माण विभाग का अपने बजट का पैसा एक ही योजना में चला गया. अन्य कार्यों के लिए आवंटित होनेवाले पैसे के लिए अब दिक्कतें होने लगी हैं.
यहां बताते चलें कि भवन निर्माण विभाग की एजेंसी झारखंड भवन निर्माण निगम लिमिटेड (जेबीसीसीएल) की तरफ से भी राज्य भर में बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के छोटे-बड़े कार्य कराये जा रहे हैं. एजेंसी भी सरकार से ही अपने खर्च की राशि निकालती है, जो एक से डेढ़ प्रतिशत है. यह योजना के आकार का ही एक पार्ट है.

