मुंगेर : योग भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहर है. योग के बल पर गंभीर बीमारियों को मात दिया जा सकता है. 21 जून को पूरे विश्व मे योग दिवस मनाया जाता है। बीते कुछ वर्ष में योग के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ा है। प्रतिदिन योग से लोग जुड़ते जा रहे हैं। योग एक संपूर्ण श्रेष्ठ जीवनशैली है। जिसमें योगासन करने से शरीर मन तथा भावनाओं का संतुलन व नवशक्ति का संचार होता है उक्त बातें जमालपुर के योगाचार्य सन्तोषनंद ने कहा. उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए योग अत्यंत जरूरी है. योग के नियमित अभ्यास से जहां व्यक्ति निरोग रहता है वहीं उसके रचनात्मक उर्जा के प्रवाह को बढ़ा देता है। एक सकारात्मक सोच पैदा करता है। योग के प्रभाव से शांति, स्वास्थ्य एवं प्रचंड उर्जा से व्यक्ति समाज और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान देता है। अच्छा स्वास्थ्य ही सफल जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि आजकल के लाइफ स्टाइल में युवा वर्ग योग से दूर हो रहे हैं। ऐसे में युवाओं में योग को लेकर जागृति जरूरी है।
12 देशों में कर चुके हैं प्रचार प्रसार।
योग गुरु ने अपने 20 साल के योग सफर में जहां बिहार झारखंड के 25 जिलों में योग शिविर के माध्यम से कैदियों को स्वस्थ करने का गुर सिखा चुके हैं। विदेश के अमेरिका, थाईलैंड, इटली, हांगकांग, मालदीप, नेपाल, सिंगापुर में भी योग के महत्व को बताते हुए अपने देश के प्राचीन पद्धति से विदेशियों को अवगत करवाते हुए योग से अपनी और आकर्षित किया।
रामदेव से मिली विद्या।
योग गुरु कहते हैं कि योग से जुड़ने की लालसा तो मुझे मुंगेर से ही मिला पर हरिद्वार में बाबा रामदेव के साथ कई कई वर्षों तक रहने के बाद योग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिला। बीएचयू में पढ़ाई पूरी होने के बाद योग के प्रचार प्रसार के लिए घर से बाहर निकल परे। योग गुरु के शिष्य आज विदेश में लगभग 30 है। गुरु संतोषनंद वर्तमान में गया जिले में निवास करते हैं जहां योग शक्ति साधना केंद्र सेवा दल संस्था चला कर हर रोज 150 से 200 लोगों को उपचार प्राचीन पद्धति योग से करते हैं। योग गुरु कहते हैं कि हम भले ही योग नगरी मुंगेर जिला से आते हैं पर दुर्भाग्य है कि योग नगरी होने के बाद अपने जिले में योग का दीपक घर-घर में नहीं जला सके हैं। इसलिए जल्द ही अपने जिले शहर समाज गांव के लिए बृहद पैमाने पर योग शिविर लगाकर लोगों को निरोग बनाने का अभियान चलाएंगे।

