रांची: मोरहाबादी स्थित डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान दिशोम गुरू शिबू सोरेन पर शोध करा रहा है. शोध की जिम्मेदारी मिली है दिल्ली यूनिवर्सिटी के सत्यवती कॉलेज के इतिहास विभाग को. शोध की अवधि तकरीबन एक साल की है और इस पर काम शुरू भी हो चुका है. शिबू सोरेन झारखंड के शायद इकलौते नेता हैं जिन पर किसी भी तरह का शोध सरकारी स्तर पर किया जा रहा है.
अध्ययन में यह देखा जाएगा कि जमींदारी-महाजन प्रथा के खिलाफ आंदोलन के शुरू होने की क्या परिस्थिति रही. साथ ही शुरूआती समय में इस आंदेालन व संगठन में कौन-कौन लोग जुड़े. उनकी क्या भूमिका रही और शुरूआती समय से लेकर आंदोलन के अंत तक और वर्तमान में संगठन की क्या भूमिका समाज में बनी हुई और उससे जुड़े लोगों के राजनीतिक-सामाजिक स्तर पर बाद में क्या बदलाव हुआ.
इसी अध्ययन में टुंडी आश्रम आंदोलन का भी उल्लेख होगा. क्योंकि सोनोत संथाल समाज के आंदेालन के साथ-साथ उक्त आंदोलन भी कोयलांचल में कोयला और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर साथ-साथ चल रहा था. इसलिए यह अध्ययन अब विभागीय स्तर पर दस्तावेजीकरण के रूप में कराया जा रहा है.

