रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार से कोरोना महामारी से लड़ने की तैयारियों के बारे में नौ सवाल पूछे और मामले की सुनवाई के लिए 7 अप्रैल की तारीख तय की है.
झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता इंदरजीत सिन्हा के इस मामले में कोर्ट को 31 मार्च को भेजे एक ईमेल का स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश डा. रविरंजन के नेतृत्व वाली खंड पीठ ने इसे एक जनहित याचिका में तब्दील कर दिया और केन्द्र तथा राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में उनका जवाब मांगा है और मामले की सुनवाई के लिए सात अप्रैल की तिथि निर्धारित की है.
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मुख्य न्यायाधीश डा. रविरंजन तथा न्यायमूर्ति एनएस प्रसाद की खंड पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सरकार से नौ सवाल पूछे हैं जिनमें कोरोना की राज्य में स्थिति, कोरोना से लड़ने के लिए बनाये गये अस्पतालों, पृथक केन्द्रों, उपकरणों, चिकित्सकों, नर्सों, बाहर से आये गये लोगों आदि का विवरण मांगा गया है.
न्यायालय ने यह भी पूछा है कि क्या राज्य के पास बाहर के राज्यों से आये ऐसे लोगों की संख्या है जिन्हें यहां से बाहर वापस भेज दिया गया?
साथ ही न्यायालय ने पूछा है कि राज्य में अब तक कुल कितने लोगों को पृथकवास में रखा गया और कितने लोगों की जांच की गयी है. इस मामले की सुनवाई 7 अप्रैल को होगी.
कोरोना वायरस के चलते न्यायालय की कार्यवाही वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की गयी.
झारखंड के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने शुक्रवार को यहां समीक्षा बैठक में कहा कि झारखंड में कोरोना पॉजिटिव के दो मामले मिलने के साथ हम महामारी के दूसरे चरण में हैं और अब हमें पूरी कोशिश करनी है कि तीसरे स्टेज में जाने से हर हाल में बचा जाए.
सिंह ने कहा, ”यह संकट का समय है. हमारा समेकित प्रयास यह होना चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा लोगों का पता लगाकर, पृथक रखकर और जांच कराकर महामारी को दूसरे स्टेज से आगे नहीं बढ़ने दें.”
उन्होंने कहा, ”लेकिन हमें तैयारी तीसरे चरण से भी निटपने की रखनी है, ताकि समस्या आने पर किसी तरह की अफरा-तफरी की स्थिति नहीं रहे.”

