आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने कहा कि झारखंड की आशा एवं आकांक्षा के अनुरूप कांग्रेस और भाजपा दोनों को अबुआ राज की समझदारी नही है. यहां की भाषा संस्कृति, स्थानीयता नीति, न्यायपूर्ण आरक्षण नीति और नियोजन नीति के बारे में कुछ नहीं समझते. झामुमो पर भी आरोप लगाया कहा कि नोट, वोट और सत्ता के लिए बार-बार राष्ट्रीय दलों के साथ मिल कर कभी सत्ता तो कभी विपक्ष की राजनीति करने वाले झामुमो ने भी भाजपा और कांग्रेस की तरह झारखंडी जनता के साथ छल किया है. झारखंडी जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सरना धर्म कोड लागू होना चाहिए. प्रकृति की करने वाले आदिवासी हिन्दू,मुस्लिम या ईसाई नहीं हैं,उनके लिए सरना धर्म कोड की मान्यता मिलनी चाहिए
अब सालखन मुर्मू ने संताली भाषा को झारखंड का प्रथम राजभाषा का दर्जा देने की मांग की है. श्री मुर्मू ने राज्य के आदिवासी नेताओं पर आरोप लगाया की उच्चस्थ पद रहते हुए आदिवासियों को पूरा हक नही दिला पा रहे है. सोमवार को दुमका में पत्रकारों के साथ बातचीत में पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन,पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू प्रमुख संताली नेता रहते हुए भी संताली भाषा के साथ न्याय नहीं किया. संताली आदिवासियों के बीच ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है. 8 वीं अनुसूची में शामिल संताली भाषा को राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है और है. संताली को झारखंड की प्रथम राजभाषा घोषित करने के साथ ही शेष झारखंडी भाषाओं को भी समृद्ध किया जाना चाहिए.

