आनेवाली सियासी पीढ़ी के लिए हाजी हुसैन सरलता का पाठ सीखा गए
चंदन मिश्र,
झारखंड की राजनीति में हाजी हुसैन अंसारी एक निहायत ही सरल और सह्रदय इंसान होने के साथ ही अपने क्षेत्र के एक लोकप्रिय राजनेता थे। देवघर के मधुपुर विधानसभा क्षेत्र से सात बार विधायक निर्वाचित होने और चार बार मंत्री बनने के बावजूद हाजी हुसैन अंसारी के व्यवहार और व्यक्तित्व में अंहकार कहीं भी छू नहीं पाया था। हर किसी से बड़े सहज अंदाज में मिलते थे। झामुमो के अध्यक्ष शिबू सोरेन के वह बहुत करीबी नेता थे। कांग्रेस से राजनीति की शुरूआत करने वाले हाजी हुसैन अंसारी 1990 के दशक में झामुमो में शामिल हो गये थे। वह बिहार विधानसभा के लिए भी निर्वाचित हुए थे। हुसैन अंसारी ने बीएससी तक की पढ़ाई की थी। वह राजनेताओं की पुरानी पीढ़ी के एक ऐसे नेता थे, जो भीड़ में रहते हुए भी भीड़ से अलग थे। किसी भी जाति और धर्म के लोगों में उनके प्रति श्रद्धा का भाव रहा।
हुसैन अंसारी पहली बार 2009 में पहली बार शिबू सोरेन के नेतृत्व में बनी सरकार में कल्याण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री बने। दूसरी बार वह अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में बनी भाजपा और झामुमो की सरकार में सहकारिता और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री बनाए गए। हुसैन अंसारी तीसरी बार 2013 में हेमंत सोरेन की अगुवाई में बनी सरकार में भवन निर्माण, सहकारिता और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री बनाए गए। 2019 में बनी हेमंत सोरेन की नई सरकार में वह चौथी बार मंत्री बने।
हाजी हुसैन अंसारी की कुछ वर्ष पहले हार्ट सर्जरी हुई थी। कांग्रेस से राजनीति की शुरूआत करने वाले हाजी हुसैन अंसारी 1990 के दशक में झामुमो में शामिल होकर झारखंड आंदोलन में सक्रिय हो गए थे। लिहाजा झामुमो के अध्यक्ष शिबू सोरेन के विश्वस्त साथियों में एक थे। झारखंड मुक्ति मोर्चा में उनकी एक लोकप्रिय अल्पसंख्यक नेता की छवि थी।
आम जीवन में लोगों से घुलने-मिलने का उनका सरल और सहज गुण अपने समर्थकों और पार्टी के लोगों के बीच उनकी एक अलग नेता की छवि पेश करता था। वह किसी से भी हंसते मुस्कुराते मिलते और बड़े सरल अंदाज में बातचीत कर लोगों का दिल जीत लेते थे। विधानसभा में कभी भी उन्हें उत्तेजित होकर बोलते या शोर-शराबा करते नहीं देखा। मंत्री रहे या विधायक, वह बड़े संयत होकर सदन में पेश आते थे। उनकी सादगी और सरलता सचमुच आनेवाली सियासी पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है।

