अबतक बजट का मात्र 20 फीसदी खर्च होना दुर्भाग्यजनक
रांची. झारखंड की हेमंत सरकार द्वारा बजट का मात्र 20 फीसदी खर्च किये जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री आदित्य साहू ने सरकार के कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा किया.कहा कि राज्य सरकार की नीति और नियत का इससे पता चलता है.
कहा कि पैसे ख़ज़ाने में पड़े हैं पर राज्य सरकार ने किसानों ,माहिलाओं गरीबों केलिये पुरवर्ती भाजपा सरकार के द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को बंद किया. प्रदेश में कर्मचारी वेतन के बिना मरीज दवाई और एम्बुलेंस के बिना मर रहे. प्रवासी मजदूर लाखों की संख्या में फिर से दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर है.किसान अपने धान के बकाये केलिये तरस रहे,बेरोजगार युवक हताश और निराश है सड़कों की स्थिति जर्जर है,सडकों पर गड्ढे ही गड्ढे हैं जिसके कारण सैकड़ों जाने जा चुकी है.कहा कि राज्य सरकार के मंत्रियों को केवल अपनी सुख सुबिधा पर खर्च करने की चिंता खूब रहती है परंतु कल्याणकारी योजनाएं कैसे जमीन पर उतारी जाएं इसकी चिंता नही है.
साहू ने कहा कि राज्य सरकार फंड रहते हुए फंड का रोना रो रही है. राज्य के फंड खर्च नहीं हो रहे हैं और केंद्र पर सवालिया निशान खड़ा करना दुर्भाग्यजनक है. राज्य के अंदर विकास कार्य ठप्प पड़ा है.
वित्तीय वर्ष 20-21 में सितंबर तक कुल योजना बजट का महज लगभग 20 फीसदी राशि का ही खर्च होना सरकार के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है. यह सरकार निकम्मी और दिशाहीन सरकार है. उन्होंने बताया कि कृषि , पशुपालन एवं सहकारिता में 0.12 फीसदी ही राशि खर्च हो पाई है. भवन निर्माण में 1.71 फीसदी राशि खर्च हुई है. श्रम नियोजनमे 2.37 फीसदी खर्च, वन पर्यावरण में 6. 45 प्रतिशत राशि खर्च, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में – 10.16प्रतिशत खर्च, ऊर्जा विभाग में 11.23 फीसदी खर्च, पथ निर्माण में 12.19 प्रतिशत खर्च, पेयजल एवं स्वच्छता में 14.12 प्रतिशत खर्च, नगर विकास विभाग 18. 61प्रतिशत खर्च, खाद्य आपूर्ति विभाग में 23.02प्रतिशत, स्वास्थ्य ,चिकित्सा एवं शिक्षा में 23.42 प्रतिशत खर्च, ग्रामीण विकास विभाग में 33.47 प्रतिशत कुल खर्च, गृह कारा एवं आपदा विभाग में 44.50प्रतिशत खर्च होना राज्य के विकास की गति बतलाता है.
उन्होंने कहा कि कृषि सुधार कानून पर ढकोसला राजनीति करने वालों का चेहरा सामने आ गया है. कृषि विभाग में महज एक फीसदी भी काम बजट की राशि खर्च हो पाई है. इससे कृषि और किसानों के प्रति सरकार की सोच स्पष्ट झलकती है. साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पास काम करने विजन नहीं है. सरकार की मशीनरी फेल है. सरकारी पदाधिकारी निष्क्रिय है. पूरी सरकार और प्रशासनिक मशीनरी कोई काम नहीं कर रहा है.

