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इंजीनियरिंग कॉलेजों और पोलिटेक्निक को नये सिरे से लंबित संबद्धता दिये जाने के फैसले से 7 हजार छात्रों को मिलेगी राहत

कैबिनेट की बैठक में लंबित एफ्लीएशन का मामला सुलझा.

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रांची : झारखंड सरकार की तरफ से इंजीनियरिंग और पोलिटेक्निक संस्थानों को नये सिरे से लंबित संबद्धता दिये जाने के फैसले से सात हजार छात्र-छात्राओं को राहत मिलेगी. राज्य के किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज और पोलिटेक्निक संस्थानों को 2014-15 से लेकर 2017-18 तक की संबद्धता स्टेट बोर्ड आफ टेक्निकल एजुकेशन (एसबीटीइ) द्वारा नहीं दी गयी थी. इसको लेकर सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों के सेकेंड ईयर और पोलिटेक्निक संस्थानों के दूसरे और छठे सेमेस्टर की परीक्षाएं नहीं ली जा रही थी.

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इन संस्थानों में पढ़नेवाले 2500 वैसे छात्रों का भविष्य भी दांव पर लगा था, जिनका कैंपस सेलेक्शन विभिन्न कंपनियों में हुआ था, पर उनके उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र संस्थान से नहीं मिल रहा था. अगस्त महीने तक इन संस्थानों में पढ़ रहे बच्चों को कैंपस सेलेक्शन को लेकर अपना प्रमाण पत्र चयनित कंपनियों को सौंपा जाना था.

यहां यह बताते चलें कि राज्य में बीआइटी सिंदरी, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज दुमका, रामगढ़ और चाईबासा समेत 14 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जिनमें सलाना 6500 से अधिक बच्चों का दाखिला प्रत्येक वर्ष होता है. कमोबेश यही स्थिति पोलिटेक्निक संस्थानों की भी है.

राज्य में 17 सरकारी पोलिटेक्निक समेत कुल 45 संस्थान हैं, जहां डिप्लोमा स्तरीय इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम संचालित होते हैं. इनके द्वारा मई 2019 तक संबद्धता को लेकर आवेदन नहीं दिये जाने की वजह से एसबीटीइ की तरफ से संबद्धता नहीं प्रदान की गयी थी. संबद्धता मामले को लेकर छात्र संगठनों ने एसबीटीइ कार्यालय में आकर धरना-प्रदर्शन और अन्य आंदोलन भी किये थे.

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