रांची: झारखंड में पांचवें और अंतिम चरण में 20 दिसंबर को जिन 16 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होना है, उनमें दुमका विधानसभा सीट भी शामिल है. यह सीट राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है, जहां राज्य की समाज कल्याण मंत्री औेर भाजपा नेत्री लुइस मरांडी तथा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के बीच सीधा मुकाबला है.
दुमका झारखण्ड की उपराजधानी है और राजनीतिक व ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद अहम है. संथाल विद्रोह के बाद 22 दिसंबर को 1855 को एक नये जिले के मुख्यालय और 1982 में संथाल परगना प्रमंडल का मुख्यालय बनने वाले दुमका की अपनी ही राजनितिक अहमियत है.
दुमका ने झारखण्ड को अब तक तीन मुख्यमंत्री, दो उपमुख्यमंत्री और तीन मंत्री दिये हैं. झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और तीसरे मुख्यमंत्री शिबू सोरेन इसी दुमका के सांसद थे. झारखंड के दूसरे उपमुख्यमंत्री प्रो स्टीफन मरांडी औेर पांचवें उपमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसी दुमका के विधायक थे.
हेमंत सोरेन राज्य के पांचवें मुख्यमंत्री भी हुए. झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के अलग झारखंड राज्य निर्माण के आंदोलन का दुमका केंद्र रहा है और झारखंड बनने के बाद भी यह प्रदेश की राजनिति का अहम केंद्र है.
दुमका विधानसभा क्षेत्र में कुल 225632 वोटर हैं, जिनमें 51.26 प्रतिशत पुरुष और 48.72 प्रतिशत महिला मतदाता हैं. 2014 के विधानसभा चुनाव में यहां करीब 69 प्रतिशत मतदान हुआ था. दुमका में इस बार कुल 13 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.
मुख्य मुकाबला इस बार भी भाजपा की प्रत्याशी लुईस मरांडी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के बीच है. 2014 के चुनाव में हेमंत सोरेन को लुईस मरांडी ने 4914 मतों के अंतर से हराया था.
लुईस मरांडी को कुल वोट का 44.65 प्रतिशत यानी 69760 वोट मिले थे, जबकि हेमंत सोरेन को 41.51 प्रतिशत यानी 64846 वोट मिले थे.
दुमका विधानसभा सीट पर 1980 से झारखंड मुक्ति मोर्चा का कब्जा रहा है. पहली बार 2005 में झामुमो को यहां तब हार का सामना करना पड़ा था, जब उसी पार्टी के लगातार विधायक रहे प्रो0 स्टीफन मरांडी बागी हो गये थे और बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे.
दूसरी बार 2014 में भाजपा ने झामुमो को यहां शिकस्त दी थी. भाजपा की इस सीट पर वह पहली जीत थी, जिसे इस बार भी भाजपा दोहारे के लिए पसीना बहा रही है.
वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए इस सीट पर वापसी उसकी प्रतिष्ठा का विषय है. हाल के वर्षों में दुमका में बहुत कुछ बदला है. यहां हुए विकास को साफ-साफ देखा जा सकता है. इस बार के चुनाव में जहां भाजपा विकास के मुद्दे पर वोट मांग रही है, वहीं झामुमो आदिवासी और झारखंडी अस्मिता के सवाल पर मतदाताओं को गोलबंद करने में जुटा है. आम मतदाताओं के लिए इस चुनाव में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा बड़ा मुद्दा है.

