रांची: एक ओर देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है. लॉकडाउन को सफल करने के लिए चौतरफा प्रयास चल रहा है.
वहीं झारखंड सरकार के मंत्री आलमगीर आलम लॉकडाउन का माखौल उड़ा रहे हैं. एक मंत्री की वजह से झारखंड के हजारों लाखों लोगों की जान सांसत में पड़ गई है.
Also Read This: कोरोना से निपटने के लिए संजय सेठ ने फिर दिए 1 करोड़ रुपए
जिस तरह मंत्री के कहने पर बसो में भरकर लोगों को रांची से संथाल परगना के कई जिलो में भेजा गया है ये सीधे-सीधे लोगों की जान जोखिम में डालना है.
मंत्री को तुरंत बर्खास्त कर उनपर आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिये. सरकार के मंत्री को इस महामारी के समय में भी वोट बैंक दिख रहा है.
जब पूरे प्रदेश में धारा 144 लगा हुआ है तो फिर लोगों को मंत्री के कहने पर एक जगह कैसे जमा होने दिया गया.
केंद्र और राज्य सरकार ने जो जहां है वहीं रहने का आदेश जारी किया है. मंत्री आलमगीर आलम ने जो किया है वह अक्षम्य है.
Also Read This: कोरोना का कहर: जगह कम पड़ने के कारण ठंडे ट्रकों में रखा शव
एक ओर दिखावे के लिए मंत्री ट्विटर पर संदेश देते हैं कि लॉकडाउन के दौरान वाहनों के लिए उनसे संपर्क ना करें.
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश का हवाला देते हैं. वहीं दूसरी ओर प्रशासन पर दबाव बनाकर लोगों की जान की परवाह किए बिना बसों में ठूंस-ठूंस कर लोगों को भिजवा रहे हैं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कह रहे हैं कि जो जहां है वहीं रहे. जब मुख्यमंत्री के संज्ञान में ये मामला आया तो वो मंत्री पर कार्रवाई करने की बजाय मामले पर लीपा-पोती कर रहे हैं.
इस गैर जिम्मेदाराना हरकत के लिए मंत्री को तत्काल मंत्रिमंडल से बाहर करना चाहिए, क्योंकि लोगों की जान से खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है.

