BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

भारत को नेट-जीरो उत्सर्जन के लिए मना रहा अमेरिका, क्या भारत देगा इसकी अनुमति ?

by bnnbharat.com
April 8, 2021
in समाचार
भारत-पाकिस्तान इस तरह संबंध सुधारने में जुटे हैं, क्या मिलेगी सफलता ?
Share on FacebookShare on Twitter

वाशिंगटन : अमेरिका जलवायु परिर्वतन के खतरों से निपटने के लिए फिर से अपने प्रयास शुरू कर दिए हैं. इस सिलसिले में अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन के क्लाइमेंट दूत जॉन केरी तीन दिन की भारत यात्रा पर रहे. केरी की यात्रा का फौरी मकसद यह है कि बाइडन के क्लाइमेंट लीडर समिट से पहले इसमें भाग लेने वाले देशों के साथ बातचीत करना है. इस वर्चुअल समिट में पीएम नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है.

अमेरिका वैश्विक जलवायु परिवर्तन से निपटने की मुहिम का नेतृत्व फिर से हासिल करने के प्रयास में है. उसका मकसद है कि 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को नेट जीरो यानी नगण्य कर दिया जाए. ब्रिटेन और फ्रांस सहित कई अन्य देशों ने पहले से ही कानून बनाए हैं, जो इस सदी के मध्य तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य रखते हैं. यूरोपीय संघ भी ऐसा कानून बनाने पर काम कर रहा है जबकि कनाडा, दक्षिण कोरिया, जापान और जर्मनी सहित कई अन्य देशों ने नेट जीरो को लेकर अपने इरादे जाहिर किए हैं. यहां तक कि चीन ने 2060 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का वादा किया है.
भारत कर रहा नेट-जीरो एमिशन का विरोधअमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन करने वाला देश है. जॉन केरी की यात्रा का मकसद यह है कि भारत को 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का संकल्प लेने के लिए राजी किया जा सके. अमेरिका चाहता कि भारत अपना पुराना रुख छोड़े. मगर भारत अभी नेट-जीरो एमिशन का विरोध कर रहा है क्योंकि उसे इससे सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना है, उसे अपनी विकास दर को तेज करना है ताकि सैकड़ों करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला जा सके. जंगल बढ़ाने या कोई अन्य उपाय करने से उत्सर्जन की भरपाई नहीं की जा सकती है. अभी कार्बन हटाने वाली अधिकांश तकनीकें या तो अविश्वसनीय हैं या बहुत महंगी हैं.

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

भारत-पाकिस्तान इस तरह संबंध सुधारने में जुटे हैं, क्या मिलेगी सफलता ?

Next Post

शिव सैनिक बाला साहेब के नाम पर झूठी कसम नहीं खा सकता: संजय राउत

Next Post
शिवसेना का कांग्रेस पर हमला, संजय राउत ने दी ये नसीहत

शिव सैनिक बाला साहेब के नाम पर झूठी कसम नहीं खा सकता: संजय राउत

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d