रांची: राजभवन के समक्ष कोयला मजदूरों के तीन दिवसीय ऐतिहासिक हड़ताल के समर्थन में वाम दलों के लोगों ने आक्रोश पूर्ण प्रदर्शन किया.
जिसका नेतृत्व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव सह हजारीबाग के पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य सह राज्य के सहायक सचिव महेन्द्र पाठक, भाकपा माले के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद, माकपा के राज्य सचिव मंडल के सदस्य प्रकाश विप्लव, मासस के सुसांतो मुखर्जी ने किया.
सुबह से ही राजभवन के समक्ष लाल झंडे और पोस्टर को लेकर वाम दलों के कार्यकर्ता जमे हुए थे और एक जुलूस के शक्ल में दरभंगा हाउस के समक्ष आक्रोश पूर्ण प्रदर्शन किया.
लोगों को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि किसी कीमत पर झारखंड के अंदर कॉमर्शियल माइनिंग वाम दलों के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे.
उन्होंने कहा कि केंद्र के मोदी सरकार कॉमर्शियल माइनिंग के बहाने झारखंड के खनिज संपदाओं को एक-एक करके अपने चहेते उद्योगपतियों को देकर झारखंड के खनिजों को दोहन करना चाहते हैं.
जिस तरह से पूर्व में ठेकेदारों द्वारा दोहन किया जाता था, उसी रूप से प्राइवेट माइनिंग में दोहन होगा. कोल इंडिया का मुनाफा राज्य एवं देश के विकास में लगाया जाता है.
लेकिन प्राइवेट माइनिंग के मुनाफा एक व्यक्ति या कंपनी का हो सकता है. आज जिस कोयला के क्षेत्र में एक से डेढ़ लाख रुपए तनख्वाह लोग उठा रहे हैं.
वहीं प्राइवेट माइनिंग में 8 से ₹10000 में काम लिए जाएंगे, कुल मिलाकर देश के नुकसान होगा. साथ ही राज्य के अंदर, पर्यावरण, सोशल इंपैक्ट कई तरह का कुप्रभाव पड़ेगा.
जब झारखंड पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आता है तो बगैर ग्राम सभा के इजाजत के बगैर राज्य सरकार की इजाजत के केन्द्र कि मोदी सरकार अपने चहेतों को राज्य की संपदाओं को दोहन करने की छूट यानी लाइसेंस देने पर आमादा है.
जिस तरह से देश के दर्जनों रेलवे स्टेशनों को बेचा गया, एयरपोर्ट को बेचा गया और लगातार खनिज संपदाओं को राष्ट्रीय संपदाओं को देश के उद्योगपतियों और पूंजी पतियों के हवाले किया जा रहा है.
जब से यह सरकार गद्दी पर आई है, तब से देश के हित में एक ईट नहीं जोड़ पाए, लेकिन पूर्व में बनाया गया सार्वजनिक सेक्टर के उपक्रमों को लगातार बेचने पर आमादा है.
आज जब देश के अंदर कोविड-19 कोरोना महामारी से आम लोग त्राहि-त्राहि कर रहा हो, ऐसी परिस्थिति में देश का और राज्य का दोहन करना आम जनता के विरोध में हैं. इसीलिए किसी भी परिस्थिति में कमर्शियल माइनिंग के शुरुआत लाल झंडे के लोग नहीं होने देंगे .
कामरेड मेहता ने कहा कि 7 जुलाई 2020 को रांची के बिहार क्लब में 11:00 बजे से राजग गठबंधन को छोड़कर सभी दलों को कमर्शियल माइनिंग के विरोध में जो लड़ाइयां लड़ रहे हैं.
वैसे राजनीतिक समाजिक एवं मजदूर संगठनों को बैठक में आमंत्रित किया गया है और राज्य के अंदर बड़ी संघर्ष की तैयारी राज्य सरकार को साथ में लेकर केंद्र सरकार के विरुद्ध आम जनता को गोलबंदी किया जाएगा.
आज कमर्शियल माइनिंग के विरोध में पूरे राज्य में लोगों का गुस्सा चरम पर है. राज्य के सभी जिलों में रांची रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, कोडरमा, चतरा, पलामु, जमशेदपुर, गुमला, देवघर, गोडा, जामताड़ा सहित कई जिलों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और वाम दलों के लोग केंद्र सरकार के प्रति गुस्सा का इजहार प्रदर्शन के माध्यम से किया.
प्रदर्शन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव सह पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य सह राज्य के सहायक सचिव महेन्द्र पाठक, जिला सचिव अजय सिंह, उमेश नजीर प्रीया प्रबीण, फरजाना फारुकी, सच्चिदानंद मिश्रा, रमजान कुरेशी, आलोका कुजूर, केवला सुकरा उरांव, बंधन उरांव, सुभेनदु सेन, माले ईश्वर केवट, अजीत तिर्की, बशीर अहमद, मोहन दत्ता, मासस के सुशांत मुखर्जी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे.

