नई दिल्लीः पूर्व पाकिस्तानी तेज गेंदबाज शोएब अख्तर पाकिस्तान क्रिकेट टीम में धार्मिक भेदभाव को लेकर जो खुलासा किया उसने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी.
पूर्व पाकिस्तानी लेग स्पिनर से टीम के ज्यादातर खिलाड़ी इसलिए भेदभाव करते थे क्योंकि वह हिंदू धर्म को मानने वाले खिलाड़ी हैं.
अख्तर के इस खुलासे के बाद कनेरिया ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उनके साथ पाक क्रिकेट टीम में धार्मिक भेदभाव की बात सही है.
कनेरिया ने यह भी कहा कि इस भेदभाव के बावजूद उन्होंने कभी धर्म परिवर्तन के बारे में नहीं सोचा. बता दें कनेरिया टेस्ट क्रिकेट में पाकिस्तान की ओर से सबसे ज्यादा विकेट (261) लेने वाले स्पिन गेंदबाज हैं.
यह पूर्व स्पिनर 2012 से स्पॉट फिक्सिंग के कारण आजीवन प्रतिबंध झेल रहा है. बता दें कि पाकिस्तान के 67 साल के क्रिकेट इतिहास को देखें तो यहां अभी तक सिर्फ 2 ही हिंदू क्रिकेटर खेल पाए हैं.
आलम यह है कि ज्यादातर खिलाड़ी हिंदू क्रिकेटर (दानिश कनेरिया) के साथ खाना भी पसंद नहीं करते थे. उन्होंने कहा, दानिश को हिंदू होने की वजह से अलग-थलग रखा जाता था.
कुछ खिलाड़ी दानिश के साथ खाने पर भी ऐतराज जताते थे.’ शोएब ने कहा कि उन्होंने अपने टीम के खिलाड़ियों को काफी समझाने की कोशिश भी की थी.
उन्होंने कहा, ‘वह बंदा आपको मैच जिता रहा है, सीरीज जिता रहा है विरोधी टीम के 6-6 खिलाड़ियों को आउट कर रहा है और तुम कैसी बात कर रहे हो.
शर्म आनी चाहिए तुम्हे.’ अख्तर ने कहा था कि वह दानिश के लिए दूसरों से लड़ने को भी तैयार थे. पूर्व पाकिस्तानी लेग स्पिनर दानिश ने कहा कि शोएब अख्तर ने जो आरोप लगाए हैं, वे पूरी तरह सही हैं.
उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तानी टीम के कुछ खिलाड़ी मेरे साथ खाना तक नहीं खाते थे, क्योंकि मैं एक हिंदू था. शोएब ने सब सही बताया है.
मैं उनके नाम भी जाहिर कर सकता हूं जो मुझसे बात करने में हिचकिचाते थे क्योंकि मैं एक हिंदू था. पहले मुझमें हिम्मत नहीं थी, लेकिन अब सब कह सकता हूं.’
पीसीबी ने इस मामले के तूल पकड़ने के बाद अपनी राय रखी और इन दोनों खिलाड़ियों के आरोपों को उनकी निजी राय बताते हुए इनसे अपना पल्ला झाड़ लिया है.
पीसीबी के प्रवक्ता ने कहा, ‘अख्तर और कनेरिया दोनों संन्यास ले चुके हैं और हमसे अनुबंधित नहीं हैं इसलिए वह जो चाहे कर सकते हैं और कह सकते हैं.
यह उनके विचार हैं. और उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट की पूरी व्यवस्था के खिलाफ नहीं बल्कि कुछ खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर आरोप लगाए हैं. ’
उन्होंने कहा, ‘जब कनेरिया खेल रहा था तब इंजमाम उल हक, राशिद लतीफ, यूनिस खान और मोहम्मद यूसुफ पाकिस्तान के कप्तान रहे.
अख्तर और कनेरिया ने जो कुछ कहा, इस पर उन्हें जवाब देना चाहिए. इसमें बोर्ड को क्यों शामिल होना चाहिए।’
जल्द ही नामों का करुंगा खुलासा
कनेरिया ने यह भी कहा, ‘इंजी भाई (इंजमाम उल हक), मोहम्मद युसूफ और यूनिस भाई ने भी हमेशा मेरा साथ दिया और जिन्होंने मेरा साथ नहीं दिया, मैं जल्दी ही उनके नामों का खुलासा करूंगा.
‘ पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी सांसद गौतम गंभीर ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘अख्तर के इस बयान ने पाकिस्तान का असली चेहरा दिखा दिया है.
‘ उन्होंने कहा, ‘भारत में मोहम्मद अजहरूद्दीन जैसे कप्तान हुए हैं, जो लंबे समय तक कप्तान रहे.
यह उस देश में हो रहा है, जिसके प्रधानमंत्री इमरान खान खुद क्रिकेटर रहे हैं. ’उन्होंने कहा, ‘कनेरिया ने अपने देश के लिए इतने टेस्ट खेले हैं.
इसके बावजूद उन्हें यह सब झेलना पड़ा तो यह शर्मनाक है.’ वहीं पूर्व पाकिस्तान कप्तान जावेद मियांदाद ने अख्तर के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान क्रिकेट में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव होता तो वह (कनेरिया) 10 साल पाक के लिए क्रिकेट नहीं खेलते.
मियादाद ने कहा, ‘पाकिस्तान ने उसे इतना कुछ दिया और वह 10 साल तक टेस्ट क्रिकेट खेला. अगर धर्म कोई मुद्दा होता तो क्या यह संभव हो पाता.
पाकिस्तान क्रिकेट में हमने कभी धर्म को लेकर पक्षपातपूर्ण रवैया नहीं अपनाया.’ बताते चलें कि अख्तर और कनेरिया को पूर्व टेस्ट खिलाड़ी इकबाल कासिम और मोहसिन खान का समर्थन मिला है.
पूर्व टेस्ट सलामी बल्लेबाज ने मोहसिन खान ने कहा, ‘एक खिलाड़ी का आकलन उसके धर्म, रंग या जाति से नहीं बल्कि उसके क्रिकेट कौशल और टीम के प्रति प्रतिबद्धता से किया जाना चाहिए.’

