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बिहार विधानसभा शताब्दी समारोह: उद्घाटन में नहीं पहुंचे तेजस्वी यादव

पटना: बिहार विधानसभा के 7 फरवरी को सौ साल पूरे हो गए. सौ साल पूरे होने पर बिहार विधानसभा शताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन किया गया है. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया.

इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने मुख्यमंत्री को सम्मानित किया. हालांकि शताब्दी समारोह में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव नहीं पहुंचे. उद्घाटन के समय उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी, परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह, संसदीय मंत्री विजय कुमार चौधरी समेत कई मंत्री और विधायक मौजूद रहे.

बिहार विधानसभा: पूरे साल चलेगा शताब्दी वर्ष समारोह

बिहार विधानसभा शताब्दी वर्ष समारोह पूरे साल चलेगा. अप्रैल, मई में इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शामिल होंगे.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधासनभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने कहा कि आज से ठीक 100 साल पहले बिहार विधानसभा भवन में लोकतंत्र की पहली बैठक हुई थी. आज का दिन बिहार के लिए ऐतिहासिक है. यह भवन कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है.

उन्होंने पूरे साल शताब्दी समारोह के आयोजन होने की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला की भी इस मौके पर चिट्ठी आई है. उन्होंने बिहारवासियों को इस ऐतिहासिक दिन बधाई दी है.

वहीं, कार्यक्रम में संबोधन के दौरान राजद के विधायक अवध बिहारी चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहा कि आज विधायकों का सम्मान खत्म हो गया है. आज विधायक फिल्ड में जाते हैं तो अधिकारी प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते.

अवध बिहार चौधरी ने कहा कि अधिकारी अब विधायकों को कोई तवज्जो नहीं देते. आज मान-सम्मान में कमी हो गई है. अगर विधायक कहीं जाता है तो अधिकारी को खड़ा होकर रिसीव करना है, कोई काम कहता है तो अधिकारियों को तत्काल करना चाहिए. लेकिन ऐसा होता नहीं है, इसलिए मुख्यमंत्री इस पर संज्ञान लें.

माले विधायक महबूब आलम के भाषण के दौरान विरोध

कार्यक्रम में उस समय गर्माहट आ गई जब भाकपा- माले विधायक महबूब आलम के संबोधन के दौरान ही विरोध होने लगा. उनके बयान पर विवाद बढ़ गया.

दरअसल, महबूब आलम ने अपने बयान में कहा था कि विधानसभा के बाहर शहीद स्मारक है. आज वहां पर तिरंगा झंडा लगना चाहिए था, लेकिन अफसोस के साथ यह कहना पड़ रहा है कि उस जगह पर तिरंगा की जगह भाजपा का झंडा लगा है.

महबूब आलम के इस बयान के बाद ही विरोध शुरू होने लगे और विवाद बढ गया. उनके इस बयान के बाद भाजपा के विधायक आक्रोशित हो गए और टोका टोकी शुरू कर दी. इसके बाद महबूब आलम के एक और बयान पर विवाद बढ गया.

सत्ता पक्ष के विधायकों ने माले विधायक की बात को अससंदीय करार देते हुए बोलने लगे. इसके बाद विधान सभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप किया और मामले को शांत किया.

विधानसभा अध्यक्ष का लिया गलत नाम

वहीं, बिहार की उप मुख्यमंत्री रेणु देवी अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर से फंस गईं. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष का नाम ही गलत बोल दिया है. फिर समझने पर सॉरी बोली… उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को विजय प्रसाद श्रीवास्तव कह दिया.

इसके बाद आभास होने पर सॉरी कह कर सुधार किया. उप मुख्यमंत्री के द्वारा अध्यक्ष को विजय प्रसाद श्रीवास्तव कहने पर मंच एवं सामने बैठे सभी माननीय चौंक गए. इसके बाद रेणु देवी संभलते हुए अपने में सुधार की.

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