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बुधनी को नहीं मिल पाया सरकारी योजनाओं का लाभ, बदले में मुखिया ने मांगा था रिश्वत

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साजन मिश्रा,

गोड्डा: जिला अंतर्गत बसंतराय प्रखंड क्षेत्र के डेरमा पंचायत के लोचनी गांव से बेहद ही गंभीर मामला सामने आया है. लोचनी गांव निवासी बुधनी खातून, उम्र-66 वर्ष ने अपना दर्द साझा करते हुए बतायी की भले ही सरकार इस बात से खुश हो कि लोगों को पक्की मकान, वृद्धा पेंशन इत्यादि जैसे लाभ मिल रहा है लेकिन सच्चाई ये है कि ये लाभ सिर्फ पैसों वालों को ही दिया जा रहा है. मालूम हो कि लोचनी निवासी बुधनी खातून का छह बेटे सहित दस सदस्यों का संयुक्त परिवार सरकारी तंत्र एवं जनप्रतिनिधि के कुंठित मानसिकता के कारण आज तक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने को विवश है.

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वहीं बुधनी का पति-सफीक नदाफ, उम्र-69 वर्ष दिल्ली में रहकर पहले रिक्शा चलाया करता था, लेकिन ढलती उम्र और शरीर से घटती ताकतें ये काम भी उनके कंधे पर कई टन के बोझ के समान हो गया जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी और दो वक्त की रोटी के लिए अब दर-दर भटककर भीख मांगने को विवश हैं लेकिन गांव में रह रही बुधनी एवं उनके पति को रहने के लिए घर और उम्र पूरा होने के बाद मिलने वाली पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया है.

मालूम हो कि बुधनी खातून अत्यंत गरीब है जिसे सरकारी सुविधाओं के लाभ मिलना भी उचित है लेकिन आवास और वृद्धापेंशन के लिए जब बुधनी डेरमा पंचायत की मुखिया नीलम देवी के पास गुहार लगाने गयी तो बदले में मुखिया नीलम देवी ने आवास के लिए पांच हजार और वृद्धापेंशन के लिए दो हजार की रुपये की मांग कर दी, जिसे दे पाना बुधनी के लिए असंभव है. जिसके बाद से लेकर अब तक बुधनी को ना तो आवास मिली है ना ही वृद्धापेंशन का लाभ. ज्ञात हो कि पंचायती चुनाव होने के बाद से लेकर अब तक डेरमा पंचायत की विकास नगण्य है वहीं लाभुकों को मिलने वाली सरकारी सुविधा भी नहीं दी जा रही है ऐसे में मुखिया के द्वारा खुलेआम रिश्वत की मांग कर लाभ ना देना ये स्पष्ट रूप से साबित करती है कि आखिर इस पंचायत की विकास क्यों अवरुद्ध है. बहरहाल बुधनी देवी ने जिला उपायुक्त सहित संबंधित विभाग का ध्यान आकृष्ट कराते हुए आवास, वृद्धापेंशन इत्यादि जैसे मिलने वाली सरकारी लाभ दिलाने की गुहार लगायी है.

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