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विलुप्ति के कगार पर कोयलांचल के जंगल

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रामगढ़ः घाटो मांडू प्रखंड अंतर्गत कोयलांचल के आस-पास के इलाकों से लुप्त होता जा रहा है जंगल वही इस संबंध में बताया जाता है कि कभी शेर ,भालू ,चिता, लकड़बग्घा, आदि जानवरों का बसेरा हुआ करता था बसंतपुर, रहावन, लाईयो, तितिर मारवा, सूअर कटवा, झुमरा के जंगलों में अनेकों प्रकार के जंगली जानवरों का बसेरा हुआ करता था.

बुजुर्ग शंभू मांझी 92 वर्षीय ने बताया की अब जंगलों की कटाई तेजी से लोग कर रहे हैं साथ ही बसंतपुर, केदला, आदि के जंगलों में जब से चिमनी ईटा भट्ठा भारी संख्या धुआं उगल रहा है. जिसके कारण तेजी से जंगलों का विनाश हो रहा है.

जंगलों की कटाई,  मिट्टी की कटाई कर तेजी से किया जा रहा है जिसके कारण बेश कीमती पेडो़ को नष्ट कर दिया जा रहा है कभी अनेकों प्रकार की जड़ी बूटी इन जंगलों में मिला करता था अब जंगल लुप्त होता जा रहा है कभी हमारे जमाने में शेर, भालू, चीता, हाथी, हिरण का बसेरा हुआ करता था.

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इन जानवरों को अपना नया ठिकाना के लिए भटकते हुए ग्रामीणों के द्वारा मारे जाते हैं. जिसके कारण जंगली जानवर लुप्त होते जा रहे हैं इस वजह से अब जानवरों की आवाज सुनाई नहीं मिलता है हर तरफ प्रदूषण ही प्रदूषण दिखलाई देता है हम लोगों को पीने के लिए पहले चुटवा नदी का पानी पिया करते थे.

इस नदी को भी प्रदूषित कर दिया गया है ईंटा भट्टे दारों द्वारा नदी को ईंटा बनाने को लेकर जगह-जगह पर नदी को बांधकर प्रदूषित कर दिया गया है इससे हम लोगों के बीच पानी की भी समस्या उत्पन्न हो गई है.

जिसको देखने वाला दूर-दूर तक कोई नहीं है समय रहते जंगल को इन भट्ठे दारों से मुक्त नहीं कराया गया तो वो समय दूर नहीं हर तरफ प्रदूषण ही प्रदूषण होगा शुद्ध हवा के लिए लोग तरसेगें ईन सब बातों को सुकरा उरांव ,मंगल मांझी, बुधनी देवी, सोमवार मांझी ,संजीलु, मांझी आदि लोगों ने एक साथ आवाज उठाई है.

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