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31 मार्च तक झारखंड पूर्णतः लॉक डाउन

लॉकडाउन से घबराने की जरूरत नहीं-रामेश्वर उरांव

रांची: झारखंड सरकार ने कोविड-19 के प्रसार पर अंकुश लगाने को लेकर 31 मार्च तक पूरे राज्य में पूर्णतया तालाबंदी (लॉकडाउन) की स्थिति को अधिसूचित करने का निर्णय लिया है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में रविवार को मुख्यमंत्री आवास में रात नौ बजे तक चली बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया.

बैठक के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कोविड-19 के संभाव्य प्रसार को देखते हुए झारखंड के इसके प्रसार को रोकने के लिए सामाजिक अलगाव के उपायों को अपनाना उचित और आवश्यक हो गया है.

इस बीमारी से भारत समेत पूरे विश्व को खतरा उत्पन्न हो गया है. महामारी रोग अधिनियम 1897 की धारा 2, 3 और 4 के तहत झारखंड महामारी रोग (कोविड-19) विनियम 2020 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राज्य सरकार ने अपने क्षेत्राधिकार में 31 मार्च तक पूर्णतय तालाबंदी (लॉकडॉउन) की स्थिति को अधिसूचित करने का निर्णय लिया गया है.

लॉकडाउन से घबराने की जरूरत नहीं-रामेश्वर उरांव

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सह वित्तमंत्री डा रामेश्वर उराँव और विधायक दल नेता सह ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने राज्य की जनता को विश्वास दिलाया है

किसी को घबराने की आवश्यकता नहीं है. स्थिति की भयावहता को देखते हुए सतर्क रहने और एहतियातन जरुरी.
प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता आलोक दूबे ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से जनता के साथ हर दुख सुख में खड़ी है, किसी को भी घबड़ाने की जरुरत नहीं है.

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झारखण्ड अब तक सुरक्षित है ऐसे में सरकार के हर निर्णय में आम जनता का सहयोग अपेक्षित है.

कौन कौन शामिल हुए बैठक में

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव  सुखदेव सिंह, खाद्य आपूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण सिंह, पुलिस महानिदेशक एम वी राव , स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव  नितिन मदन कुलकर्णी, श्रम विभाग के प्रधान सचिव  राजीव अरुण एक्का, परिवहन विभाग के सचिव के रवि कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल जी तिवारी, रांची के उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक विशेष रूप से मौजूद थे .

लॉकडाउन का क्या है मतलब?
एक शहर को लॉक करने का मतलब है कि इस अवधि के दौरान कोई भी घर से बाहर नहीं निकल सकता है. हालांकि दवाओं, बैंकों, अस्पतालों और राशन-पानी को घर से बाहर जाने की अनुमति है. लॉकडाउन एक तरह का आपातकाल है.

यदि किसी शहर या इलाके में तालाबंदी की घोषणा की जाती है, तो लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है. लॉकडाउन की स्थिति में, किसी भी व्यक्ति को जीवन जीने के लिए केवल बुनियादी और आवश्यक चीजों के लिए बाहर जाने की अनुमति है. लॉकडाउन में, यदि किसी को राशन, दवा, पानी, सब्जी की जरूरत है, तो वह बाहर जा सकता है या फिर बैंक के लिए अनुमति दी जा सकती है.

कोरोना वायरस लॉकडाउन कहां है?

भारत की बात करें तो देश भर में तालाबंदी की घोषणा नहीं की गई है. वर्तमान में जनता कर्फ्यू को रोकने के लिए घोषणा की गई थी. भारत में राजस्थान, पंजाब, ओडिशा, झारखंड पूरी तरह से बंद हो गए हैं. महाराष्ट्र के चार शहर और मध्य प्रदेश के लगभग आठ शहर बंद कर दिए गए हैं. गुजरात के कई शहरों में भी तालाबंदी है.

दुनिया भर में बात करें तो इस महामारी के कारण लगभग 35 देश बंद हो गए हैं. इटली, ब्रिटेन, स्पेन आदि देशों ने भी तालाबंदी की घोषणा की है. इन्हें छोड़कर अमेरिका ने कैलिफोर्निया को बंद कर दिया है.



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बीएनएन भारत की अपील कोरोनावायरस महामारी का रूप ले चुका है. सरकार ने इससे बचाव के लिए कम से कम लोगों से मिलने, भीड़ वाले जगहों में नहीं जान, घरों में ही रहने का निर्देश दिया है. बीएनएन भारत का लोगों से आग्रह है कि सरकार के इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें. कोरोनावायरस मुक्त झारखंड और भारत बनाने में अपना सहयोग दें.

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