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कोरोना बदल रहा है अपना स्वरुप, यह बदलाव भारत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

by bnnbharat.com
April 12, 2020
in समाचार
कोरोना बदल रहा है अपना स्वरुप,  यह बदलाव भारत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.
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दुनियां के तमाम वैज्ञानिको ने अपने रिसर्च में कई चौकाने वाले खुलासे किए हैं. वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की तीन वंशावली भी खोज निकाली है. बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण से दुनिया में अबतक लगभग एक लाख लोगों की मौतें हो चुकी हैं और करीब 15 लाख से ज्‍यादा संक्रमित हैं.

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वुहान शहर से शुरू होने के बाद से अब तक कोरोना वायरस में कई चरणों में क्रमिक विकाश हुए हैं. ऐसा कहा जा सकता है की यह खुदको नए क्लाइमेट में अनुकूलित करने के लिए करता है यह एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन  है बेहद खतरनाक.

शुरुवात में विशेषज्ञों का मानना था कि भारत में इसका असर कम हो सकता है क्योंकि भारत में अभी जलवायू परिवर्तन का समय है, लेकिन कोरोना वायरस की शिफ्टिंग क्षमता को देखते हुए लगता है की भारत में यह बहुत भयावह रूप लेने वाला है.
शुरुवात में मरीजों में कोरोना के लक्षण जैसे छींक आना, खासी , सर्दी बुखार आदि कुछ दिनों बाद से दिखने लगते थे, लेकिन बाद के दिनों में मरीजों में कई दिनों तक ऐसे लक्षण दिखाई नहीं दिए परन्तु उनका टेस्ट में कोरोना +Ve आय.


अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक नोवल कोरोना वायरस के तीन विभिन्न रूपांतर हैं जो करीब से संबंधित वंशों का समूह है जिन्हें उन्होंने ‘ए’, ‘बी’ और ‘सी’ से अंकित किया है.
मानव मरीजों से अनुक्रमित शुरुआती 160 पूर्ण विषाणु जीनोम (जीनों का समूह) का आकलन कर सार्स-सीओवी-2 के कुछ मूल प्रसार को वंशावलियों में इसके परिवर्तित स्वरूप के जरिए मानचित्रित किया गया.
अध्ययन के प्रमुख लेखक, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के आनुवंशिकी विज्ञानी पीटर फोर्स्टर ने कहा,

“बहुत तेजी से बहुत उत्परिवर्तन हुए हैं जिससे कोविड-19 फैमिली ट्री को ठीक-ठीक समझना मुश्किल था. हमने विश्वसनीय लगने वाली सभी वंशावलियों की एक साथ कल्पना करने के लिए गणित के नेटवर्क अल्गोरिद्म का इस्तेमाल किया.”

फोर्स्टर ने कहा,

“इन तकनीकों को ज्यादातर डीएनए के जरिए पूर्व ऐतिहासिक मानव आबादी के विकास के मानचित्रण के लिए जाना जाता है. हमारा मानना है कि यह पहली बार है जब उन्होंने कोविड-19 जैसे कोरोना वायरस के क्रमिक विकास का पता लगाने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया है.”

वैज्ञानिकों ने 24 दिसंबर 2019 से लेकर चार मार्च 2020 के बीच दुनिया भर से लिए नमूनों से विषाणु के जीनोम से प्राप्त डेटा का इस्तेमाल किया है.

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अध्ययन में कोविड-19 के तीन रूपांतरों और उनमें हुए उत्परिवर्तनों के बारे में विस्तार से बताया गया है. यह अध्ययन ‘पीएनएएस’ मैगजीन में प्रकाशित हुआ है.

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