रांचीः उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग पॉलिटेक्निक कॉलेजों का कोर्स बाजार की मांग के अनुसार डिजायन करें. तकनीकी शिक्षा देने के पहले हम रिसर्च करें कि पॉलिटेक्निक के किस कोर्स में रोजगार के क्या अवसर है. यह भी आकलन करना होगा कि कौन सा परंपरागत कोर्स या ट्रेड अब बाजार की मांग के अनुरूप उपयोगी नहीं रहा है.
तकनीकी शिक्षा के मूल में उसका मकसद सुनिश्चित होना चाहिए. अगर पॉलिटेक्निक कॉलेजों से निकले लोगों को रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे, तो पूरी कवायद ही बेकार होगी. वहीं उन्होंने निर्देश दिया कि निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित पॉलिटेक्निक कॉलेजों की समीक्षा उनकी आवश्यकता के अनुरूप करें. अगर जरूरत नहीं हो, तो उसका उपयोग स्किल सेंटर के रूप में निजी भागीदारी के आधार पर किया जाए. साथ ही, पॉलिटेक्निक कॉलेजों के संबद्धता के मसले का निवारण विश्वविद्यालय स्तर पर ही किया जाना चाहिए. इसी मकसद से तकनीकी विश्वविद्यालय की स्थापना भी की गई है. यह बातें झारखण्ड के मुख्य सचिव डॉ. डी के तिवारी ने आज झारखंड मंत्रालय में उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए कही.

तारामंडल और साइंस सिटी का पैकेज बनाएं
मुख्य सचिव ने रांची के वराहमिहिर तारामंडल व वहां स्थित साइंस सिटी के अपग्रेडेशन पर बल देते हुए कहा है कि तारामंडल, साइंस सिटी और एस्ट्रोनॉमी क्लब के साथ वहां कैफेटेरिया, लेजर शो, म्युजिकल बैंड आदि का एक पैकेज बनाएं. शौचालय और बैठने का प्रबंध करें, जिससे वहां जानेवाले लोग ज्ञानवर्द्धन के साथ कुछ घंटे मनोरंजन कर सकें. उन्होंने निर्देश दिया है कि तारामंडल से संबंधित जानकारी ऑनलाइन करें। इससे यह पता चलेगा कि तारामंडल का शो कब-कब होता है. वहीं टिकट का मूल्य तथा ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी उससे मिल सकेगी.
इंजीनियरिंग कॉलेजों के संचालन में समन्वय बनाएं
मुख्य सचिव ने राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों के संचालन के लिए प्राइवेट इंजीनियरिंग संस्थानों मनिपाल, एमिटी, बीआइटी, बीआइटी पिलानी से विभागीय स्तर पर समन्वय बनाने का निर्देश दिया है. वहीं बीआइटी मेसरा को अनुदान देने के पहले यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उसमें शर्त के अनुसार झारखंड के कितने छात्रों का नामांकन हुआ है. साथ ही, उनसे ली जानेवाली फीस की आमदनी व अन्य आमदनी तथा व्यय की क्या स्थिति है.
श्रम नियोजन विभाग रोजगार डैशबोर्ड बनाए
मुख्य सचिव ने श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि रोजगार कार्यालय की घटती उपयोगिता के मद्देनजर रोजगार डैशबोर्ड बनाने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि इसी डैशबोर्ड के माध्यम से सभी रिक्तियों की सूचना दें. उन्होंने कहा कि मुख्य उद्देश्य यह है कि रोजगार देनेवाले नियोक्ता तथा नियुक्ति प्राप्त करनेवाले कर्मियों को एक प्लेटफार्म पर एक साथ लाया जा सके. उन्होंने चालू योजनाओं के तहत् बन चुके 10 आइटीआइ भवनों में तीन माह के भीतर पढ़ाई शुरू करने का निर्देश दिया. अवांछनीय हो चुके ट्रेडों की पढ़ाई बंद कर रोजगार के अनुरूप ट्रेडों पर फोकस करने का निर्देश दिया. साथ ही निर्मित हो चुके 16 स्किल सेंटरों में भी मार्च तक गतिविधि शुरू करने का निर्देश दिया. वहीं विभिन्न स्तर के बीमाकृत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिले लाभ (क्लेम) का डाटाबेस एक माह में बनाने का भी निर्देश दिया है. इसका डाटा जुटाने में बीमा कंपनी और श्रमिक मित्र की सहायता लेने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इसके लिए पंजीकृत श्रमिकों को भी बल्क एसएमएस भेज उन्हें जागरूक करें.
सरकारी भवनों के सामान्य रख-रखाव का जिम्मा संबंधित ऑफिस हेड को दें
मुख्य सचिव ने सरकारी भवनों के सामान्य रख-रखाव का जिम्मा संबंधित विभागों के हवाले करने की पॉलिसी बनाने का जिम्मा भवन निर्माण सचिव सुनील कुमार को दिया है. इस बाबत मुख्य सचिव ने कहा कि जैसे कोई भी व्यक्ति अपने भवन की रंगाई-पोताई सहित छोटी-मोटी मरम्मत हर वर्ष कराता है, उसी तरह इसका जिम्मा ऑफिस हेड को देना चाहिए. इसके लिए एक सामान्य राशि का प्रावधान होगा. जिससे पूरे साल जरूरत के अनुसार टूटे नल, इलेक्ट्रिक की गड़बड़ी, दरवाजे -खिड़की की सामान्य गड़बड़ी, साफ-सफाई समेत अन्यान्य छोटे-मोटे मरम्मत के काम होंगे. उन्होंने कहा कि छोटे-मोटे काम को छोड़ देने से वह धीरे-धीरे बड़ा दायित्व बन जाता है. हर वर्ष रंगाई-पुताई और सामान्य मरम्मत होने से भवन की जहां आयु बढ़ जाएगी, वहीं वह देखने में भी सुंदर लगेगा.
बैठक में ये थे मौजूद
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संपन्न समीक्षा बैठक में विकास आयुक्त सुखदेव सिंह, योजना सह वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव के के खंडेलवाल, उच्च शिक्षा के प्रधान सचिव शैलेश कुमार सिंह, श्रम विभाग प्रधान सचिव राजीव अरूण एक्का, भवन निर्माण सचिव सुनील कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे.

