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उस व्यक्ति से लड़ाई है, जिसने शहर को नर्क बना दिया: पवन शर्मा

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निरज कुमार,

रांची: चैम्बर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष पवन शर्मा ने कहा कि मैं कोई नेता नहीं हूं, मेरी एमएलए बनने की इच्छा भी नहीं है. उन्होंने कहा कि चैंबर के राज्यस्तरीय बैठक में उन्हें प्रेरणा मिली, जिसकी बदौलत वह आज रांची के निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जनता से मुखातिब हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि झारखंड अलग हुए 19 साल बीत गए, लेकिन राजधानी रांची 100 साल पीछे चली गई है. जो रांची पहले थी, वह अब नहीं है. पहले खेलने के लिए मैदान थे. महिलायें आजादी से घूम सकती थीं. व्यवसायी आसानी से अपना व्यवसाय चला सकता थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. लोग पहले अधिक खुश थे.

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उन्होंने सीपी सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि जबसे वे व‍िधायक बने हैं, तब से उनके पास 10 बार जा चुके हैं, पर उन्होंने उनकी बात नहीं सुनी. मैंने उनसे कहा था कि जनता की आवाज को सामने रखना चाहिए, पर उन्होंने असहाय होते हुए कहा था कि मेरी बात कोई नहीं सुनेगा. तब मैंने कहा था कि चैंबर के साथ-साथ व्यापारी आपके साथ धरना पर बैठेंगे, पर उन्होंने इस पर कभी ध्यान नहीं दिया. उन्होंने कभी किसी व्यापारी और उनका दर्द नहीं सुना. यही कारण है कि इस शहर का छोटे व्यापारी को यह निर्णय लेना पड़ा.

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पवन शर्मा ने कहा कि उन्हें मजबूरन उन्हें चुनाव लड़ने के लिए खड़ा होना पड़ा. उनकी कोई पार्टी या मोदी जी से लड़ाई नहीं है. उनकी लड़ाई उस व्यक्ति से है, जिसने शहर को नर्क बना दिया. भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी ने विकराल रूप ले लिया है. परिवहन व्यवस्था गर्क में चली गयी है. परमिट की कोई व्यवस्था नहीं है. ट्रांसपोर्ट नगर की कोई व्यवस्था नहीं है. जिन्हें कोई सुनने वाला नहीं है, ऐसी राजधानी नहीं होती.

उन्होंने आगे कहा कि मैं वोट मांगने नहीं निकला हूं. मैं जनता की तकलीफ जानने के लिए निकला हूं. उन्होंने रांची के किशोरगंज स्थित बाल्मीकि नगर इलाके का उदाहरण देते हुए बताया कि वह नरक है. राज्य के मुखिया रोज वही से गुजरते हैं, पर कभी उनका ध्यान इस पर नहीं गया. असली नरक देखना है तो यहां आकर देखिए.

उन्होंने मोरहाबादी में एक व्यापारी पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह रिम्स पहुंचे तो वहां उसको देखने वाला कोई नेता नहीं था. आज रिम्स की हालत ऐसी हो गई है कि‍ कोई अंदर जाए तो बेहोश हो जाएगा. दो-तीन साल पहले उसी व्यापारी के बच्चे पर हमला हुआ था. उसे दुकान में गोली मार दी गयी थी,जिससे उसकी मौत हो गई थी.

मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज का समय ऐसा है कि‍ महिलाएं घर से निकलने से डरती है. घर से निकलने से पहले उसके घर वाले बोलते हैं कि ‘कहीं चैन तो नहीं पहना है’. दिनदहाड़े इस तरह की बातें हो रही है. कब तक बर्दाश्त करें. कौशल विकास देने के नाम पर सरकार ने करोड़ों और अरबों का गबन किया है.

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