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दिव्यांग बने प्रेरणा, समाज को दिखाई नई राह

by bnnbharat.com
July 5, 2020
in समाचार
दिव्यांग बने प्रेरणा, समाज को दिखाई नई राह
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  • तीन नेत्रहीन व सात शारीरिक रूप से दिव्यांगजनों ने समाज की धारणा बदली

रांची: झारखंड में रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड के बारीडीह गांव के 10 दिव्यांग जनों के समूह ने समाज के लिए एक मिसाल कायम की है. समूह द्वारा जन वितरण प्रणाली की दुकान संचालित की जा रही है. साथ ही ये लोग वर्षों से खेती बाड़ी का काम भी कर रहे हैं. समूह में तीन लोग नेत्रहीन हैं जबकि सात शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं .

समाज में योगदान देने के लिए शारीरिक रूप से सक्षम होना जरूरी नहीं है, बल्कि सोच सही होनी चाहिए. ऐसी ही मिसाल कायम की है रांची जिले के बारीडीह गांव के 10 दिव्यांगजनों के समूह ने.

ओरमांझी प्रखंड के बारीडीह पंचायत के नारायण कुमार महतो, बलवंत कुमार, रामेश्वर महतो और घुमेश्वर मुंडा समेत 10 दिव्यांगजन गांव में  जन वितरण प्रणाली की दुकान चला रहे हैं.

मार्च 2018 में इन्हें झारखंड राज्य आजीविका मिशन की ओर से दुकान का आवंटन किया गया था, तब से यह एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

ये लोग जन वितरण प्रणाली की दुकान तो चला ही रहे हैं, साथ ही मनरेगा के तहत भी काम करते हैं. इसके अलावा परिवार में खेती-बाड़ी भी इनके जिम्मे है.

समूह के सदस्य नारायण कुमार महतो जो पैर से लाचार हैं . उनका कहना है कि जन वितरण प्रणाली की दुकान चलाने से गांव वालों का नजरिया दिव्यांग जनों के प्रति बदला है और सभी लोग उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते हैं.

नारायण कुमार महतो ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांग शब्द की परिभाषा गढ़ उन जैसे लोगों में नयी ऊर्जा भरने काम किया है.

खुद पैर से लाचार नारायण महतो उन लोगों को भी नसीहत देतें हैं जो काम नहीं मिलने का बहाना ढूंढते हैं. उनका  कहना है कि वर्तमान सरकार रोजगार सृजन पर बहुत ज्यादा ध्यान दे रही है और काम की कोई कमी नहीं ऐसे में लोगों को बेरोजगारी का रोना छोड़ काम करना चाहिए.

समूह के दूसरे सदस्य रामेश्वर महतो नेत्रहीन है. इनका कहना है कि दृष्टि बाधित होने के बावजूद वे खेती बाड़ी का काम करते हैं और समूह से जुड़कर जन वितरण प्रणाली की दुकान भी चला रहे हैं. जिससे उन्हें आत्म सम्मान की अनुभूति होती है.

इसमें कोई संदेह नहीं मनुष्य को शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्थिति, कमजोरी या संबल प्रदान करती है. रांची के इन 10 दिव्यांगजनों के समूह ने साबित का दिया है कि खुद को लाचार और अक्षम मानने की बजाय स्वयं में ही वो दिव्य शक्ति जागृत की जाए जो समाज में प्रकाश पुंज की तरह योगदान दें.

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