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विदेशों में पढ़ाई महंगी होने से लाखों छात्रों का टूट रहा सपना

एक डॉलर की कीमत 29 अगस्त, 2019 को 71 रुपए 80 पैसे दर्ज की गई। ऐसे में इसका सीधा असर शिक्षा पर भी पढ़ रहा है

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देश की अर्थव्यवस्था में सुस्ती देखी जा रही है। ऐसे में इसका असर विभिन्न सेक्टर पर पड़ रहा है। ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम जैसे सेक्टरों की हालत खराब है। वहींं रुपए में भी लगातार गिरावट दर्ज हो रही है। एक डॉलर की कीमत 29 अगस्त, 2019 को 71 रुपए 80 पैसे दर्ज की गई। ऐसे में इसका सीधा असर शिक्षा पर भी पड़ रहा है। विदेशों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को इसकी मार सबसे ज्यादा झेलनी पड़ रही है। विदेश में पढ़ाई का खर्चा बढ़ गया है। इसका सिर्फ पढ़ने वाले छात्र ही नहीं, बल्कि जो छात्र विदेश जाने की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए भी समस्याएं बढ़ गई हैं।

पिछले कुछ सालों से भारत से विदेश जाकर पढ़ने का क्रेज बढ़ा है। इसमें मैनेजमेंट, मेडिकल, इंजीनियरिंग व अन्य कोर्सेज करने के लिए छात्र विदेश जा रहे हैं। 2018 में विदेश मंत्रालय के आकड़ों के अनुसार लगभग साढ़े सात लाख भारतीय स्टूडेंट्स विदेश में पढ़ रहे हैं। इसमें साल दर साल वृद्धि ही हो रही है। ऐसे में अभिभावकों को पैसा देना अब जेब पर भारी पड़ रहा है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि जुलाई में रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले 68 थी, अब गिरकर 72 रुपए हो गई है। ऐसे में अगर कोई बच्चा अपने पिता से फीस के तौर पर 20 हजार डॉलर ले रहा है, तो जुलाई में अभिभावक को 13 लाख 60 हजार रुपए भेजने पड़ रहे थे। अब उन्हें, 14 लाख 40 हजार रुपए भेजने पड़ेंगे। ऐसे में अभिभावक के ऊपर 80 हजार का बोझ बढ़ गया।

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इसके अलावा देश में बड़ी संख्या लोन लेकर विदेश में पढ़ाई करने वालों का है। वहीं, इस लोन वाले वर्ग में सबसे ज्याद मिडिल क्लास हैंं। उन्हें अब और अधिक लोन लेना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी कार्यक्रम के तहत अधिकतम 20 लाख का लोन दिया जाता है। लेकिन इतने पैसों में अमेरिका जैसे देशों में पढ़ना और रहना मुश्किल है। वैसे से भी सबसे ज्यादा छात्र अमेरिका में ही पढ़ते हैं। लोन के लिए अभिभावकों बैंक में कुछ प्रॉपर्टी बतौर सिक्योरिटी रखनी पड़ती है। ऐसे में ज्यादा लोन लेने के लिए ज्यादा कीमत की प्रॉपर्टी सिक्योरिटी के लिए रखनी होगी। इसका भी सीधा असर अभिभावकों पर पड़ेगा।

कॉलेज की फीस एक बार में जमा हो जाती है, लेकिन इसके अलावा रहने और खाने का खर्च भी है। रुपए की कीमत में गिरावट की वजह से अब बच्चों को ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में हम कह सकते हैं की रुपए की गिरावट की वजह से शिक्षा क्षेत्र में मार पड़ी है। इसे सबसे ज्यादा छात्र परेशान हो रहे हैं।

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