धनबाद : देश को धनबाद कोयलांचल उर्जा देने का काम करता है, लेकिन दुर्भाग्य है कि धनबाद के लोगों को ही बिजली की आंख मिचौली से आये दिन परेशान होना पड़ता है. बच्चों की पढाई से लेकर इसका असर व्यवसाय पर भी पड़ रहा है. उमस भरी इस गर्मी में लोग एक तरफ जहां मौसम की मार झेल रहे हैं, वहीं विभाग भी रुलाने का काम कर रही है. जीरो कट बिजली आपूर्ति का दावा करने वाली विभाग की पोल खुलती नज़र आ रही है. इसको लेकर आम से खास और गृहणी से लेकर व्यवसाई सभी परेशान हैं. यह अजीब त्रासदी है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे थर्मल पावर स्टेशनों तक धनबाद से कोयले की आपूर्ति होती है. आस-पड़ोस के जिलों में डीवीसी के थर्मल पवार स्टेशनों का जाल बिछा हुआ है. इसके बावजूद धनबाद के कारोबार, उद्योग धंधे, बिजली की गाज गिरते रहती है.
उमस भरी गर्मी में कोयलांचल में बिजली की मार से धनबाद वासियों का जीना मुहाल हो चुका है. आये दिन बिजली की आंख मिचौली से जहां छात्र-छात्राएं काफी परेशान हैं, वहीं कोयलांचल का व्यापार बिजली के कारण पूरी तरह ठप हो चुका है. बिजली संकट से त्रस्त उपभोक्ता अब इस लड़ाई को फेसबुक में भी शामिल कर चुके हैं. साथ ही उपभोक्ता बड़े आंदोलन का भी मूड बना रहे हैं. समाचार-पत्रों में विज्ञापन और फिर फेसबुक पर छिड़ी बहस ने बिजली संकट के मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है.
मोमबत्ती युग में जीने को मजबूर हैं लोग
धनबाद वासियों की मानें तो उनका साफ तौर पर कहना है कि उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान करने के बाद भी मोमबत्ती युग में जीने को मजबूर है. औद्योगिक नगरी के उपभोक्ता केंद्र के बाद झारखण्ड में बनी भाजपा सरकार से अच्छे दिन की उम्मीद लगाये बैठे हैं. मुख्यमंत्री रघुवर दास के लिए बिजली संकट बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है. अब देखना यह है कि आम उपभोक्ता, लघु उद्योग, व्यापार एवं छात्रों को इस अभूतपूर्व बिजली संकट से कब निजात मिलती है.

