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19 साल बाद भी नहीं है अस्पताल का खुद का कोई भवन

नहीं हुआ अबतक डॉक्टरों का पदस्थापन

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जमशेदपुर(ईचागढ़): यूं तो सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था पर करोड़ों खर्च करने का दावा करती है. मगर उन सरकारी दावों का जमीनी हकीकत क्या है? और इसकी सच्चाई क्या है? इसे बताने के लिए सरायकेला-खरसावां जिले का ईचागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काफी है.

सरकार सालाना स्वास्थ्य के लिए करोड़ों रुपए का बजट बनाती है. मगर ईचागढ़ प्रखंड के अंतर्गत पड़नेवाले 14 पंचायत और कुकड़ू प्रखंड के 5 पंचायत की करीब डेढ़ लाख आबादी के लिए बने ये सरकारी अस्पताल के लिए दुर्भाग्य ये है कि राज्य अलग होने के 19 साल बाद भी इस अस्पताल का खुद का कोई भवन नहीं है.

कई सरकारें आई और चली गई. कई जनप्रतिनिधि यहां के लोगों को सब्ज़बाग दिखाकर चले गए. मगर एक अदद भवन नहीं बनवा सके. हद तो ये है कि डेढ़ लाख की आबादी के लिए जरूरी डॉक्टरों का भी पदस्थापन भी इस अस्पताल में आज तक नहीं हो सका है. जबकि जो डॉक्टर पदस्थापित हैं वो भी नियमित सेवा नहीं दे पाते है. जबकि इस अस्पताल के लिए डॉक्टरों का स्वीकृत पद सात है. मगर वर्तमान में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर हरेंद्र सिंह मुंडा को लेकर कूल चार ही डॉक्टर पदस्थापित है.

वहीं डॉक्टर हरेंद्र सिंह मुंडा ज्यादातर सरकारी कार्यों में ही उलझे हुए रहते है. अस्पताल में हर दिन डेढ़ सौ से भी अधिक मरीजों का इलाज किया जा रहा है. वैसे आपको बता दूं कि यह अस्पताल वर्तमान में अंग्रेजों के जमाने के एक छोटे से भवन में संचालित हो रहा है. वहीं इस अस्पताल का अपना कार्यालय भवन भी नहीं है.

कार्यालय भी एक सामुदायिक भवन में चल रहा है. जहां दवाओं और अन्य मशिनीयरी सामानों का रखरखाव भी भगवान भरोसे ही चल रहा है. तस्वीरों में आप साफ देख सकते हैं किस तरह अस्पताल में दवाएं जहां- तहां बिखरी नजर आ रही है.

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वहीं यहां ईलाज के लिए आनेवाले मरीजों और उनके परिजन अस्पताल की अव्यवस्था से बेहाल नजर जरूर आते हैं. मगर ये करें तो आखिर क्या करें? क्योंकि इनके लिए सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने विकास के लिए सीमित पैमाना तय कर रखा है, वो है झूठा और कोरा आश्वासन.

वहीं सीएचसी प्रभारी डॉक्टर हरेंद्र सिंह मुंडा की अगर माने तो, सरकार की ओर से जो संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं वह नाकाफी है. आबादी के हिसाब से यहां संसाधनों की घोर कमी है.

अब सवाल ये उठता है कि, पिछले 19 सालों में सरकारें आई गई. मगर जनता की सुध लेने की परवाह किसी ने नहीं की. खासकर स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के नामपर भी पिछली सभी सरकारों ने महज खानापूर्ति की.

ईचागढ़ विधानसभा सीट से चुने गए जनप्रतिनिधि भी जनता से किए गए वायदों को चुनाव के बाद भूलते रहे हैं और यही कारण है कि… की पिछले विधायक को जनता ने इसबार नकार कर अपने लिए नया जनप्रतिनिधि चुना है और उनकी सरकार भी है. ऐसे में वर्तमान में झामुमो विधायक सविता महतो जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरती है या इस बार भी क्षेत्र की जनता ठगी जाती है ये तो आनेवाला वक्त ही बताएगा.

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