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आज भी लालू प्रसाद का क्रेज नहीं हुआ हैं कम, बिहार-झारखंड की राजनीति के रहे केंद्र बिंदु

लालू के साथ सेल्फी लेने के लिए समर्थक ने अपनी जान जोखिम में डाली

रांची: चारा घोटाले मामले में सजायाफ्ता राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद तीन साल से अधिक समय से रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में कैदी के रूप में रहे, इसके बावजूद उनका क्रेज कम नहीं हुआ. जेल में रहने के बावजूद बिहार-झारखंड की राजनीति के वे एक केंद्र बिंदु बने रहे. शनिवार की  जब उन्हें रांची के रिम्स स्थित पेइंग वार्ड से एंबुलेंस से एयरपोर्ट ले जाया जा रहा था, तो उनके एक समर्थक ने जान जोखिम में डालकर अपने नेता के साथ सेल्फी लेने की कोशिश की.

सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा लालू प्रसाद को चारा घोटाले के मामले में दोषी करार दिये जाने और अलग-अलग मामलों में सजा सुनाये जाने के बाद उन्हें प्रारंभ में कुछ दिनों के लिए रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में रहना पड़ा. लेकिन बाद तबीयत खराब होने के बाद उन्हें रांची के रिम्स में भर्ती कराया गया. कुछ दिनों तक बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची से बाहर भी गये और कुछ दिनों के लिए वे अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की शादी को लेकर पैरोल पर भी रहे. लेकिन वर्ष 2017 के दिसंबर से रांची में सजा काट रहे लालू प्रसाद जेल में रहने के बावजूद बिहार की राजनीति के लिए केंद्रबिन्दु बने.

लोकसभा चुनाव हो या बिहार-झारखंड विधानसभा चुनाव चुनाव हो, आरजेडी के अलावा सहयोगी गठबंधन दल के नेता लगातार उनसे मिलने आते रहे. जेल मैनुअल के मुताबिक, सप्ताह में सिर्फ तीन लोगों को ही लालू प्रसाद से मुलाकात की अनुमति दी थी, लेकिन कई मौके पर विशेष अनुमति के तहत लालू प्रसाद अपने परिवार और अन्य दलों के नेताओं से भी मिले. इस दौरान कुछेक मौके पर लालू प्रसाद के समर्थकों पर जेल मैनुअल का उल्लंघन करने का भी आरोप लगा और इस मामले की सुनवाई अभी हाईकोर्ट में भी चल रही है.

दूसरी तरफ लालू प्रसाद के कई समर्थक ऐसे भी थे, जो उनसे मुलाकात की चाह में अक्सर रांची आते थे और अपने साथ सत्तू, कई तरह की सब्जियां, तिलकुट और अन्य सामान लेकर आते थे, जो लालू प्रसाद को पसंद था. इन सारे सामानों को जांच के बाद लालू प्रसाद के पेइंग वार्ड तक पहुंचा दिया जाता था. केली बंगले और पेइंग वार्ड में लालू प्रसाद के रहने के दौरान बाहर में टहलते आरजेडी कार्यकर्त्ताओं को सिर्फ इस पल का इंतजार रहता था कि उन्हें अपने नेता की झलक मिल जाए.