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सारठ के ‘रण’ में हर कोई लगा है जीत का झंडा गाड़ने में

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दुमका: संथाल परगना का सारठ विधानसभा क्षेत्र सामान्य सीट है. भाजपा अपना खाता खोलने के प्रयास में है.

झाविमो फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की जुगत में है. झामुमो हाथ से निकली सीट को पुन: पाने की कोशिश में लगा है.

यानी सारठ के रण क्षेत्र में हर कोई जीत का झंडा गाड़ने में लगा है. पिछले चुनाव में झाविमो से जीते विधायक रणधीर सिंह भाजपा में शामिल हो गये थे.

अभी वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा के हारे प्रत्याशी उदय शंकर सिंह उर्फ चुन्ना सिंह अब झाविमो के उम्‍मीदवार हैं.

लोकसभा चुनाव में स्थिति

सारठ विधानसभा क्षेत्र दुमका लोकसभा के अंतर्गत आता है. पिछले लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार ने बढ़त बना ली थी.

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भाजपा को उम्‍मीद है कि यह स्थिति कायम रहेगी. मुख्‍यमंत्री रघुवर दास ने भी जन आशीर्वाद यात्रा के जरिये यहां के वोटरों को रिझाने का प्रयास किया है.

ये भी हैं उम्‍मीदवार भाजपा से रणधीर कुमार सिंह, झामुमो से परिमल सिंह ऊर्फ भूपेन सिंह, झाविमो से उदयशंकर सिंह, एआईएमआईएम से मुमताज अंसारी, आजसू फिरोज मियां, एलजेपी कुमार राजीव रंजन सिंह, निर्दलीय सिराजुद्दीन अंसारी और पिंकी कुमारी, आम आदमी पार्टी उपेन्द्र नाथ मंडल.

अब तक की स्थिति 1952 में जानकी प्रसाद सिंह विधायक बने. बद्री नारायण सिंह तीन साल के लिए विधायक रहे.

तीसरे विधायक प्रजातांत्रिक सोशलिस्ट पार्टी के बद्रीनारायण सिंह, चौथे कामदेव प्रसाद सिंह प्रसोपा, पांचवें नलिनी प्रसाद सिंह, छठे कामदेव प्रसाद सिंह, सातवें चंद्रमौलेश्वर प्रसाद सिंह जनता पार्टी और आठवें हूल झारखंड के अभयचरण लाल बनें.

नौवें, दसवें और ग्यारहवें विधायक के रूप में हैट्रिक लगाने वाले उदय शंकर सिंह पहली बार निर्दलीय, दूसरी व तीसरी बार कांग्रेस से विजयी रहे.

बारहवें विधायक झामुमो के शशांक शेखर भोक्ता बनें. 13वें विधायक उदय शंकर सिंह बनें. 14वें विधायक झामुमो के शशांक शेखर भोक्ता और 15वें झाविमो से रणधीर सिंह बनें.

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