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सरकार बदलते ही चरमराई विद्युत व्यवस्था, उठ रहे हैं कई सवाल

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गोड्डा (बसंतराय):   20 दिसम्बर को सभी चरणों के चुनाव सम्पन्न होने बाद अधिकतम सीटों पर अपना जनादेश पाते हुए महागठबंधन के द्वारा 29 दिसम्बर को झारखण्ड के मुख्यमंत्री के रूप में हेमन्त सरकार की ताजपोशी की. जिसके बाद से ही गोड्डा जिले के ग्रामीण क्षेत्र बसंतराय,पथरगामा,महेशपुर इत्यादि जैसे कई फीडरों में बिजली रानी सिर्फ अपना होने का अनुभव करा रही है

जिससे लोगों के जुबां पर बिजली व्यवस्था में हुए बदलाव को सत्ता परिवर्तन के पश्चात से होकर देखा जा रहा है.वहीं लोगों की माने तो ऐसा भी कहा जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन राज्य स्तर पर हुआ है जबकि गोड्डा का प्रतिनिधित्व अभी भी भाजपा के ही जिम्मे है ऐसे में बिजली व्यवस्था की लचर हालात पर भाजपा विधायक अमित मण्डल की चुप्पी आने वाले पांच वर्षों के लिए कई तरह के सवालिया निशान खड़ा कर रही है.

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ज्ञात हो कि विधानसभा चुनाव के पूर्व तक गोड्डा जिले के विभिन्न फीडरों में बिजली व्यवस्था ठीक-ठाक चल रही थी लेकिन जिस दिन से झारखण्ड में नए सरकार का गठन हुआ है उसके बाद से बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. चुनाव पूर्व लोगों को जहां 24 घण्टे में लगभग 18 से 20 घण्टे बिजली मिल रही थी वहीं चुनाव के बाद अब लोगों को महज 6 से 8 घण्टे ही बिजली मिल पा रहे हैं, ऐसे में अचानक हुए बदलाव से लोगों का सवाल सरकार और बिजली विभाग से होना लाजमी है.

लोग सरकार और बिजली विभाग के इस प्रकार के रवैये से आने वाले गर्मी को लेकर अभी से ही चिंतित हैं. वहीं विद्युत अभियंता मधुसूदन मांझी से जब इस संदर्भ में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जहां से बिजली उत्पादन होती है वहां से सप्लाई के लिए सामान्य से भी कम मेगावाट बिजली मिल रही है जिस कारण उपभोक्ताओं को बिजली की कटौती का सामना  करना पड़ रहा है. ऐसे में इस परेशानी से निकलने के लिए के लिए उत्पादन के लिए अधिक मेगावाट बिजली मिलने के बाद ही उबर पाने की संभावना है.

shaktiman

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