रांची: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की कृषि परामर्श सेवा ने प्रदेश के किसानों को धान का रोपा कार्य पूरा होने पर परती रह गये ऊपरी खेत में खेती करने का परामर्श दिया है. कृषि वैज्ञानिकों ने ऊपरी खेत परती रहने की स्थिति में विभिन्न सब्जियों के अलावा कुल्थी या सरगुजा की खेती करने की सलाह दी है.
इसके तहत जारी एग्रोमेट एडवाईजरी बुलेटिन में कुल्थी की खेती में वीएलजी -19 या बिरसा कुल्थी में से किसी एक उन्नत किस्म का चुनाव करने तथा एक एकड़ खेत में बोआई के लिए 8 किलो बीज का प्रयोग करने को कहा गया है. बोआई के लिए खेत तैयार करने के बाद बीज को हल के पीछे कतार में 30 सेंटीमीटर (कतार से कतार) और 10 सेंटीमीटर (पौधा से पौधा) की दूरी पर बोने तथा बीज को बोने से पहले राराइजोबियम कल्चर से उपचारित करने की सलाह दी गई है.
सरगुजा की खेती में बिरसा नाइजर -1, बिरसा नाइजर -2, बिरसा नाइजर -3 या पूजा-1 में से किसी उन्नत एक किस्म की बोआई करने को कहा गया है. एक एकड़ में बोआई के लिए 2.5 किलो ग्राम प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करने, खेत तैयार करने के बाद बीज को हल के पीछे कतार में 30 सेंटीमीटर (कतार से कतार) तथा 15 सेंटीमीटर (पौधा से पौधा) की दूरी पर बोने को कहा गया है. छिड़काव विधि से बोआई में 3.5 किलो ग्राम प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करने का परामर्श दिया है.

