नीता शेखर,
रांची: कहते हैं पिता कठोर होते हैं. वह किसी की भावनाओं की कद्र नहीं करते हैं. ऊपर से नारियल भी सख्त होता है और भीतर से मुलायम. पिता भी वैसे ही होते हैं, ऊपर से सख्त अंदर से मुलायम.
किसी कवि ने कहा है “धरती से धीरज दिया और आसमान से ऊंचाई, हर दुखों को सह लेता है जो उस जीवित प्रतिमा को कहते हैं हम पिता.”
एक पिता सभी बच्चों का पालन कर लेते हैं पर सब बच्चे मिलकर भी एक पिता को नहीं पाल सकते. पिता अपनी पूरी जिंदगी पैसे कमाने के चक्कर में गुजार देता है, ताकि उसका परिवार सुरक्षित रहे और बच्चे जीवन में पढ़ लिखकर कुछ बन जाएं.
पर सारी जिंदगी वह यही सुनता है आपने क्या किया है? परंतु उसकी त्याग की भावना को कोई नहीं समझता! बेटी की विदाई पर सबसे ज्यादा पिता ही रोता है, क्योंकि पिता परिवार की चिंता करते हैं और बेटी पिता की.
एक पिता की सारी लाइफ गुजर जाती अपने बच्चों को सवारने में. वह हर फर्ज निभाते हैं, जीवन भर कर्ज चुकाते हैं, बच्चों की खुशी के लिए अपनी खुशी भूल जाते हैं, वही बच्चे बड़े होकर अपने पिता को भूल जाते है.
एक घटना मुझे याद आ रही है… एक बार किसी बच्चे का पैर उसके पापा के जूतों के नीचे दब गया पर उसने कहा नहीं अचानक पिता ने खून की धारा बहते देखा तो अपने बच्चे से कहा तुमने मुझे बताया क्यों नहीं…? बच्चे ने डरते हुए कहा… मुझे डर था आप डांट दोगे. उसने कहा मुझे हर डांट याद है जो आपने मुझे कितनी बार डांटा है.
पिता ने बड़े प्यार से बच्चे की ओर देखा और पूछा बेटा तुम यह बताओ तुम्हें यह तो याद है कि मैंने तुम्हें कितनी बार डाटा पर क्या तुम्हें यह याद है कि मैंने तुम्हें कितनी दफा प्यार किया.
जीवन की सच्चाई यही है हम दुख को तो याद रखते हैं पर उनके द्वारा किए हुए लाड दुलार को भूल जाते है. समझने वाले यह नहीं समझते हैं कि एक पिता सिर्फ एक पिता ही नहीं बल्कि एक पति, एक बेटा, एक भाई भी होता है. उसे एक नहीं कई-कई जिम्मेवारी निभानी पड़ती है.
जब पहली बार कोई लड़की शादी के बाद अपने पिता के घर हंसते हुए आती है तो सब से खुश पिता ही होता है, क्योंकि जब वह अपनी बेटी का हंसता हुआ चेहरा देखता है तो मानो उसे जीवन की सारी खुशियां मिल गई हो. वह अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाते हैं. जिसे सब समझते हैं कि पिता बहुत कठोर प्रवृत्ति के हैं, मगर लोग यह नहीं समझते हैं कि अगर पिता कठोर ना बने तो घर को सुरक्षित रखना और सारे रिश्तों को समेटना कितना कठिन हो जाएगा.
एक बात हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि पिता भी एक भगवान का ही रूप होता है, जो अपने परिवार की रक्षा के लिए 24 घंटे तैयार रहता है. लेकिन यह जगजाहिर है कि हम अपने पिता को आदर और सम्मान नहीं दे पाते हैं, जिसके वह हकदार है, हमें अपने पिता की हमेशा मान सम्मान और उनकी भावना की आदर करनी चाहिए.


