एक फ्लॉक टैंक से मासिक 20-25 हजार का हो रहा है मुनाफा
रांची: कोरोना संक्रमण के इस दौर में जहां लोग अपने एवं अपने रिश्तेदारों और करीबियों को बचने बचाने की जद्दोजहद कर रहे है. वहीं पाकुड़ जिला अंतर्गत महेशपुर प्रखंड के सोनारपाड़ा गांव के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बिट्टु कुमार दास जैसे कई युवा नीली क्रांति के सपने को साकार करने में जुटे हैं.
पाकुड़ जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर की दुरी पर पश्चिम बंगाल से सटा सोनारपाड़ा गांव है. सोनारपाड़ा के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बिट्टु कुमार दास ने लगभग 10 कट्ठा जमीन पर इंटीग्रेटेड फॉर्म लगाया है.
उन्होंने एक साल पहले तकरीबन 2 लाख रूपये की राशि से चार बायो फ्लॉक टैंक का निर्माण कराने के बाद मछली पालन का काम शुरू किया था. बिट्टु कुमार दास की कड़ी मेहनत की वजह से धीरे-धीरे उनका मत्स्य पालन का काम जोर पकड़ा और वे आज इसके जरिय अच्छी आमदनी जुटाकर आत्मनिर्भर बन चुके हैं.
जब देश में कोरोना संक्रमण का फैलाव शुरू हुआ और लोग बाजारों में कम संख्या में निकलने लगे, तब भी बिट्टु कुमार दास ने वैसे विकट हालात में भी नीली क्रांति की मशाल जलाये राखी और उसे लेकर आगे बढ़ते रहे. उन्होंने इस दौरान भी पश्चिम बंगाल के नईहट्टी से मछली का जीरा लाया और अपने इंटीग्रेटेड फॉर्म में मछली पालन को जारी रखा.
बिट्टु फिलवक्त मछली पालन से प्रतिमाह 20 से 25 हजार रूपये की आमदनी जुटा रहे हैं. उनका मानना है कि यदि उन्हें क्रियाशील पूंजी मिल जाय और नियमित बिजली मिले तो आमदनी प्रतिमाह लाख रूपये से ऊपर होगी.
पश्चिम बंगाल के मल्लारपुर प्राइवेट पॉलिटेक्निक कॉलेज में बतौर सहायक शिक्षक अपनी सेवा दे रहे बिट्टु महेशपुर के लोगो को स्वादिष्ट मछली का सेवन कराने के साथ साथ पश्चिम बंगाल के मुरारोई और रघुनाथगंज में वृहद पैमाने पर मछली की आपूर्ति भी करते हैं.
आज पश्चिम बंगाल के आधा दर्जन स्थानों से कारोबारी मछली की खरीददारी करने सोनारपाड़ा स्थित बिट्टु के फॉर्म हाउस पहुंच रहे है. महेशपुर प्रखंड के आसपास के गांवो के लोग भी ताजा और स्वादिष्ट मछली खरीदने यहां आ रहे है.
इधर पाकुड़ उपायुक्त कुलदीप चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करने और उनकी आर्थिक स्थिति में मजबुती लाने के लिए कार्य योजना बनायी गयी है. मछली पालन को कृषि के साथ जोड़ने पर बल देते हुए उन्होंने बताया कि जिला मॉनिटरिंग टीम को तालाबों में कन्वर्जन कर मत्स्य पालन को बढ़ावा देने का काम किया जायेगा.
केंद्र और राज्य सरकार के प्रोत्साहन से देश के कर्मठ युवा आत्मनिर्भर भारत को मूर्त रूप देने में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं, जो न केवल उनके लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, बल्कि यह देश और समाज के लिए भी हितकारी साबित हो रहा है.

