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जांच के लिए रांची से टीम पहुंची
रांची: कहते हैं कि वनकर्मी वनों के रक्षक होते हैं. इन्हीं के कंधों पर न सिर्फ वनों के सुरक्षा की जिम्मवारी होती है बल्कि वन्य जीवों के संरक्षण का जिम्मा भी इनके जिम्मे ही होता है. लेकिन यही रक्षक भक्षक बन जाए तो वनों और वन्य जीवों की दशा और दिशा भगवान भरोसे रह जाती है.
ऐसा ही एक मामला इन दिनों चतरा में सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है. जिसके बाद स्थानीय नेता और लोग गोलबंद होने लगे हैं. मामला वन विभाग से जुड़ा है.
चतरा दक्षिणी वन प्रमंडल के सिमरिया वन क्षेत्र पदाधिकारी उमेश प्रसाद द्वारा अवैध लकड़ी के उपयोग से अपने आवासीय परिसर में बनाए जा रहे फर्नीचर का फोटो और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.
जिसमें कहा जा रहा है कि रेंजर अपने पद का दुरुपयोग कर जंगलों के बहुमूल्य लकड़ियों को कटवाकर निजी स्वार्थ हेतु आवास में कुर्सी, टेबल व अन्य फर्नीचर का निर्माण करा रहे हैं.
सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि रेंजर आवास के जिस कमरे में स्थानीय कारीगरों द्वारा फर्नीचर का निर्माण कराया जा रहा है वहां बाहर से ताला बंद कर दिया गया है ताकि किसी की नजर उसपर न पड़े.
लेकिन किसी ने फर्नीचर निर्माण का वीडियो बनाकर और फ़ोटो खींचकर सोशल मीडिया में पोस्ट कर दिया. जिसके बाद मामले में स्थानीय लोग और विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता आरोपी रेंजर के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को ले गोलबंद होने लगे हैं.
मामले को तूल पकड़ता देख स्थानिय भाजपा नेता भी एक्टिव हो गए हैं. भाजपा नेता आलोक रंजन ने मामले में सरकार से कार्रवाई की मांग की है.
उन्होंने सरकार के नीति पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि क्या सरकार के कानून का डंडा गरीबों पर ही चलता है. अगर अधिकारी गुनाह कर रहे हैं तो सरकार मौन क्यूं बैठी है.
उन्होंने कहा है कि रेंजर आएदिन विवादों में रहते हैं. इस बार अवैध तरीके से लकड़ी कटवाकर फर्नीचर बनवा रहे हैं. इससे पहले हिरण शिकार और उसका मांस खाने के मामले में उनकी भूमिका संदिग्ध रही थीं. बावजूद उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं होना अपने आप सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है.
हालांकि इस मामले में आरोपी रेंजर तस्वीरों को झुठलाते हुए पुराने फर्नीचर की मरम्मती कराने की बात कर रहे है. उनका कहना है कि पुराने फर्नीचर का रंग-रोगन कराया जा रहा है. जबकि तस्वीरों में साफ झलक रहा है कि नई फर्नीचर का निर्माण कराया जा रहा है.
इधर, गुरुवार को वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह के निर्देश पर एक टीम चतरा पहुंची और मामले की छानबीन शुरू की.

