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जीत की फसल काट पाएंगे पूर्व कृषि मंत्री

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दुमका: जिला मुख्‍यालय से 27 किलोमीटर दूर बस है शिकारीपाड़ा. इस इलाके में सबसे अधिक आबादी आदिवासी जनजाति समुदाय की है. ज्‍यादातर लोग कोयला और खनिज खदानों में काम करके अपनी जीविका चलाते हैं.

इस विधानसभा क्षेत्र पर बीते तीन दशक से झारखंड मुक्ति मोर्चा का कब्जा रहा है. यहां से विधायक रहे नलिन सोरेन राज्य के पूर्व कृषि मंत्री भी रहे हैं. लगातार सातवीं बार वे जीत की फसल काटने के लिए मैदान में उतरे हैं.

वे यहां से महागठबंधन के उम्मीदवार हैं. इस चुनाव में उन्हें जीत की फसल काटने से रोकने में भाजपा सहित अन्य दल लगे हैं. झामुमो प्रत्याशी पर भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं. यहां से भाजपा के उम्‍मीदवार पिछला विधानसभा चुनाव झाविमो की टिकट पर लड़े थे. दूसरे नंबर पर रहे थे.

ये भी हैं मैदान में-

झारखंड मुक्ति मोर्चा से नलिन सोरेन, भाजपा से परितोष सोरेन, जनता दल यूनाइटेड से सालखन मुर्मू, झाविमो से राजेश मुर्मू, झारखंड की क्रांतिकारी पार्टी से देबू देहरी, लोक जनशक्ति पार्टी से शिवधन मुर्मू, झारखंड पीपुल्‍स पार्टी से सुनील कुमार मरांडी.

अब तक की स्थिति-

  • 1952 में झारखंड पार्टी के विलियम हेम्ब्रम जीते.
  • 1969 में निर्दलीय चढरा मुर्मू निर्वाचित हुए.
  • 1972 में झारखंड पार्टी से शिबू मुर्मू को जीत मिली.
  • 1977 में बाबूलाल किस्कू विधायक बनें.
  • 1979 में बाबूलाल किस्कू के असामयिक निधन पर 1980 में हुए उप चुनाव में झामुमो के टिकट पर डेविड मुर्मू.
  • 1985 में भी डेविड जीते.
  • 1990 में नलिन सोरेन पहली बार जीते.

इसके बाद 1995, 2000, 2005, 2009 और 2014 के चुनाव में भी उनकी जीत हुई.

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ajmani