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सनौर में जन्मे स्वतंत्रता सेनानी ने ली अंतिम सांस

by bnnbharat.com
February 13, 2020
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सनौर में जन्मे स्वतंत्रता सेनानी ने ली अंतिम सांस

सनौर में जन्मे स्वतंत्रता सेनानी ने ली अंतिम सांस

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गोड्डा: गोड्डा जिला के बसंतराय प्रखंड के डेरमा पंचायत अंतर्गत सनौर गांव में जन्मे स्वतंत्रता सेनानी मतिकांत मिश्रा ने आज 96 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली.

रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित पंक्तियां…
मुझे तोड़ लेना वनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ पर जाए वीर अनेक.

आज ऐसे ही पंक्ति को चरितार्थ करते हुए आजादी में अपनी अहम भूमिका प्रदान करने वाले सनौर निवासी मतिकांत मिश्र ने अंतिम सांस ली. मालूम हो कि दिवंगत मृतात्मा सनौर के मिश्र घराने के हिंदी साहित्य के उद्भट विद्वान श्रद्धेय जनार्दन मिश्र “परमेश” के चार पुत्रों में ज्येष्ठ पुत्र थे. उनकी मृत्यु भागलपुर में हुई जिसकी खबर गुरुवार को सुबह गांव में मिली और ग्रामीणों के अंदर स्वाभिमानी मातमी सी छा गयी.

वहीं जिले से लेकर प्रखंड के लोगों ने अपनी अपनी संवेदनाएं भी व्यक्त करने लगे. उनके बड़े पुत्र मिथलेश मिश्रा ने बताया कि भारतीय स्वंत्रता के अंतिम सोपान सन 1942 की अगस्त क्रांति के उद्घोष “भारत छोड़ो” कि स्वर्ण जयंती के अवसर पर गणतंत्र दिवस समारोह समिति के तत्वावधान में बिहार राज्य के बांका जिला अंतर्गत पंजवारा में प्रशप्ती पत्र प्रदान किया गया था.

उल्लेखनीय प्रशस्ति पत्र में दिवंगत आत्मा के भारत छोड़ो अभियान के अंतर्गत विशेष योगदान का वयाख्यान करते हुए कहा गया है कि अपने खून को तेल बनाकर स्वांत्रता के संघर्ष दीप को जलाए रखने वाले एवं स्वतंत्रता की देवी को अपने वैयक्तिक सुख की बलि दे दी है.

मालूम हो कि अंग्रेजी सत्ता के दमन चक्र में पड़कर जीवन मृत्यु की झिलमिल छाया में जेल की यातनाएं तक झेलनी पड़ी लेकिन फिर भी इनके दृढ़ संकल्प एवं अपार अदम्य, उत्साह निरंतर संग्राम के बीहड़ पथ पर इन्हें बढ़ने को प्रेरित करता रहा. इनका त्याग बलिदान आज भी सवांत्रता प्राप्ति के इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में अंकित है काल के अंतराल में छिपे इनके शौर्य वीर्य की गाथा को हर कोई आज भी नमन किया.

दिवंगत मतिकांत मिश्रा जिन्होंने अपने पीछे अपनी अर्धांगिनी, दो पुत्र व दो पुत्री सहित नाती-पोता से भरा पूरा परिवार को छोड़ कर चले गए. वहीं निधनोपरांत वर्तमान थाना प्रभारी गिरधर गोपाल ने सनौर गांव पहुंचकर स्वतंत्रता सेनानी मतिकांत मिश्रा को तिरंगा झंडा ओढ़ाकर उन्हें अंतिम सलामी दी. इसके बाबत उन्होंने फूलमाला देकर अपनी संवेदना प्रकट की साथ ही उन्होंने कहा कि आज ऐसे ही महापुरषों के चलते हमारा देश गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर आज आजादी की खुली सांस ले रहे हैं, आज हमलोगों ने एक ऐसे अनमोल रत्न खोया जिसकी भरपाई आजीवन अब नहीं हो सकती है.

मौके पर बसंतराय थाना प्रभारी मुकेश कुमार सिंह, प्रखंड विकास पदाधिकारी शेखर कुमार, जमनिकोला पंचायत की मुखिया बीनू मिश्रा, डेरमा पंचायत की मुखिया नीलम देवी, उपमुखिया अभय कुमार मिश्र, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुबोध चन्द्र झा, संजय झा, महाप्रसाद झा आदि मौजूद थे.

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