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झामुमो के गढ़ को ध्वस्त करने में जुटे गणेश महली और घाटशिला में आजसू पार्टी के प्रदीप बलमुचू ने भाजपा-झामुमो का बिगाड़ा गणित

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खास बाते:-

  • पिछले चुनाव में सरायकेला से झामुमो के चंपई सोरेन सिर्फ 1200 मतों से की थी जीत हासिल

  • घाटशिला में त्रिकोणीय संघर्ष के आसार, भाजपा के लखन मार्डी, झामुमो के रामदास सोरेन और आजसू के प्रदीप बलमुचू के बीच दिलचस्प मुकाबला

रांची: सरायकेला विधानसभा क्षेत्र झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का गढ़ माना जाता है. यहां से झामुमो के दिग्गज नेता चंपई सोरेन तीन बार से लगातार विधानसभा चुनाव जीत रहे हैं. पिछले चुनाव में चंपई सोरेन ने भाजपा प्रत्याशी गणेश महाली को महज 1200 वोटों से हराया था. जानकार मान रहे हैं कि इस बार भी दोनों प्रत्याशियों के बीच मुकाबला जोरदार होगा.

राजा रजवाड़ों का शहर रहा है सरायकेला

सरायकेला राजा रजवाड़ों का शहर रहा है. देव वंश के लोगों ने इस स्थान को सजाने और निखारने में अपनी भूमिका अदा की थी लेकिन अब तो न राजा रहे और ना ही उनकी विरासत, बस खंडहरों में बच गया है उनका वजूद. बात करें अगर इस विधानसभा की चुनावी विसात पर तो यह क्षेत्र झामुमों का गढ़ रहा है. जेएमएम ने एक बार फिर चंपई सोरेन पर अपना दांव लगाया है. जेएमएम प्रत्याशी चंपई सोरेन भाजपा सरकार द्वारा विपक्ष के विधायकों के काम में रोड़ा अटकाने को विकास में बाधक बता रहे हैं. वहीं, भाजपा प्रत्याशी गणेश महाली वर्तमान विधायक के विकास को लेकर गंभीर नहीं होने की बात कर रहे हैं. उनका कहना है कि इतने दिनों तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद जेएमएम विधायक ने सरायकेला के लिए कुछ नही किया.

step by step

भाजपा और झामुमो की अपनी-अपनी है रणनीति

पिछले पांच साल में भाजपा ने संगठन और बूथ स्तर पर विधानसभा क्षेत्र में लगातार कई कार्यक्रम चलाए हैं. इस कारण पार्टी अपने मजबूत संगठन और बूथ पर पकड़ के बल पर सरायकेला विधानसभा सीट को अपनी झोली में डालना चाहती है. वहीं, अपनी परंपरागत सीट को बचाने के लिए यहां झामुमो रणनीती बनाने में जुटी हैं.

घाटशिला में त्रिकोणीय संघर्ष

पूर्वी सिंहभूम ज़िले का घाटशिला विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है. यहां से तीन प्रमुख दल के कद्दावर नेता खड़े हैं. तीनों दिग्गज एक दूसरे को टक्कर देंगे. इस वजह से यहां त्रिकोणीय मुकाबला का आसार है. भाजपा से लखन मार्डी, झामुमो से रामदास सोरेन तथा कांग्रेस छोड़कर आजसू में शामिल हुए डॉ प्रदीप कुमार बलमुचू के बीच दिलचस्प मुकाबला होगा.

सभी वर्ग के वोटरों को साधने में लगे हैं उम्मीदवार

घाटशिला की बात करें तो यहां आदिवासी करीब 50 प्रतिशत, सामान्य व महतो वोटर 40 प्रतिशत और मुस्लिम वोटर दस प्रतिशत है. इन पर सभी प्रत्याशियों की नजर है. आदिवासी मतों का यहां बिखराव होने की पूरी संभावना है. ऐसे में सामान्य वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका में होंगे. जेएमएम के प्रत्याशी रामदास सोरेन का एजेंडा क्षेत्र में शिक्षा में सुधार के साथ साथ रोजगार के क्षेत्र में काम करने का होगा. वहीं पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू के पाला बदलने के बाद घाटशिला क्षेत्र में कांग्रेसी तो प्रत्यक्ष रूप से आजसू प्रत्याशी के साथ नजर आ रहे हैं. वहीं विभिन्न पार्टियों के प्रत्याशियों से रूठे कार्यकर्ता भी पाला बदल सकते हैं. ऐसे में सभी समर्थकों की सूची पार्टी प्रत्याशी बना रहे हैं औऱ उनपर विशेष नजर भी रख रहे हैं.

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