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पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ोतरी से किसान आत्महत्या को मजबूर
रीवा: केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा लगातार पेट्रोलियम पदार्थों में की जा रही बेतहाशा वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए जनता दल सेक्यूलर के प्रदेश अध्यक्ष शिव सिंह एडवोकेट ने कहा कि कोरोना महामारी के नाम अरबों खरबों की राशि वसूल कर हजम करने वाली सरकार पेट्रोलियम भाव बढ़ा कर देशवासियों के जेब में खुलेआम डाका डाल रही है.
सिंह ने कहा कि हफ्ते में दो से तीन बार डीजल पेट्रोल के दाम बढ़ाए जा रहे हैं, जिसका भार सीधे जनता की जेब में पड़ रहा है. देशवासी कोरोना महामारी के चलते आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं.
सरकार की राहत राशि तो दूर पेट्रोलियम पदार्थों सहित समस्त जरूरी सामग्री के मूल बढ़ाकर सरकार जनता का खून पीने पर आमादा है. सिंह ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों में की गई मूल्य वृद्धि का असर सीधे किसान पर पड़ रहा है.
आज किसान के गेहूं का मूल्य 20 रुपए प्रति किलो से भी कम है, लेकिन डीजल एवं पेट्रोल का मूल्य 80 से 90 रुपए प्रति लीटर है. उधर प्राकृतिक आपदाओं के चलते किसान के द्वारा पैदा की गई. फसलों का खर्च तक नहीं निकल पा रहा.
ऐसे में सरकार लगातार महंगाई बढ़ाकर जजिया करके ऊपर जजिया कर वसूल रही है, जिसके चलते किसान आत्महत्या कर रहा है. सिंह ने देशवासियों व किसानों से अपील करते हुए कहा कि निरंकुश सरकार के द्वारा की जा रही जुल्म ज्यादती के विरोध में सड़क से सदन तक आंदोलन प्रदर्शन कर सबक सिखाने का काम करें.

