दिल्ली: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का मानना है कि किसानों की समस्याएं और आशंकाएं सिर्फ बातचीत से ही दूर हो सकती हैं. केंद्र की ओर से भेजे गए प्रस्तावों पर किसानों को बैठकर बात करनी चाहिए और आंदोलन खत्म कर देना चाहिए. केंद्र सरकार हर मुद्दे पर बातचीत करने और समाधान निकालने की हर कोशिश कर रही है. किसान आंदोलन से जुड़े सवालों पर उनके जवाब…
इतने दिन हो गए हैं, लगातार किसान और सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है. सरकार क्या कर रही है? अब किसान रेल रोकने और सड़क मार्ग भी बाधित करने की बातें कह रहे हैं?
जवाब – हमारे द्वारा किए कानून संशोधनों को लेकर कुछ किसान संगठनों ने जो भी बातें सरकार के सामने रखी हैं, सरकार उस पर खुले मन से लगातार बातचीत कर रही है. किसान संगठनों के साथ 14 अक्तूबर को सचिव स्तर पर चर्चा हुई. 13 नवंबर को मैंने खुद किसान संगठनों के साथ बैठक की. इसके बाद हम लगातार चर्चा कर रहे थे, इसी बीच 26-27 नवंबर के आंदोलन की घोषणा हो गई. इसके बाद तीन दिसंबर की तारीख किसान संगठनों के साथ बैठक के लिए तय की गई, लेकिन हालात को देखते हुए एक दिसंबर को ही किसानों के साथ चर्चा की, उसके बाद तीन और पांच दिसंबर को भी लंबी बैठक किसान संगठनों के साथ हुई. आठ दिसंबर को गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी चर्चा हुई.
लेकिन किसान नए प्रस्ताव से भी सहमत क्यों नहीं हो पा रहे हैं? उनके चर्चा के लिए तैयार न होने के पीछे क्या वजह है?
जवाब – हमने किसानों की शंकाओं के आधार पर मुद्दे चिन्हित किए और उसी आधार पर प्रस्ताव हमने किसान संगठनों को भेजा है. इस पर चर्चा के माध्यम से ही हल निकल सकता है. जब बिंदु बताए जा रहे थे तब उन्होंने पराली और बिजली संबंधी मुद्दे भी जोड़ने को कहा जिन्हें हमने स्वीकार किया है.’
अगर आंदोलन ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में आम लोगों को बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा!
जवाब – ठंड और कोरोना की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए मैं किसान संगठनों से यही अपील करता हूं कि वे तत्काल आंदोलन समाप्त करें. चर्चा जारी है, हम भरोसा दिलाते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार किसानों के हित में जो सबसे उचित होगा वही कदम उठाएगी. संगठनों को किसानों के साथ ही आम लोगों की भी चिंता करनी चाहिए.’
क्या सरकार इन बिलों को वापस ले सकती है या ऐसी कोई संभावना है. क्या यह मांग व्यावहारिक है?
जवाब – देखिए, कानून में कौन-कौन से प्रावधान हैं जिन पर किसानों को आपत्तियां हैं, उन पर हम खुले मन से चर्चा के लिए तैयार हैं. हमने किसान संगठनों को संशोधन का प्रस्ताव भी भेजा है, उसमें वही बिंदु हैं जिन्हें लेकर किसान संगठनों ने आपत्ति जताई थी. कानून वापस लेना समस्या का समाधान नहीं है और कानून किसानों की बेहतरी के लिए ही लाया गया है, ये बात उन्हें समझनी चाहिए.’

