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झारखंड में सरकारी खजाना खाली ! रघुवर सरकार ने पांच साल में लिए 47640.14 करोड़ कर्ज

अब तक झारखंड पर 85234 करोड़ है कर्ज, नई सरकार के लिए होगी चुनौती

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रांचीः नई सरकार के लिए वित्तीय संकट से निकलना चुनौती होगी. झारखंड सरकार का सरकारी खजाना हो गया है. यही नहीं रघुवर सरकार ने पिछले पांच साल में विकास योजनाओं एवं अन्य मदों के लिए 47640.14 करोड़ कर्ज भी लिया है. अब तक झारखंड में कुल कर्ज 85234 करोड़ रुपए का हो गया है. नई सरकार के लिए कर्ज चुकता करना एक बड़ी चुनौती भी होगी. बताते चलें कि पिछले 14 साल (राज्य गठन से लेकर 2014 तक) में विभिन्न सरकारों द्वारा कुल 37593.36 करोड़ ही कर्ज लिये गये थे.

कैसे कर्ज चुकाना होगी चुनौती

85234 करोड़ का कर्ज चुकता करना नई सरकार के लिये बड़ी चुनौती होगी. राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, राज्य से सिर्फ 19250 करोड़ ही टैक्स मिलेगा. इसके अलावा केंद्र से अनुदान के रूप में 13850 रुपये ही मिलेंगे. इन दोनों को जोड़ दिया जाये तो कुल राशि होती है 33100 करोड़. फिर भी 52134 करोड़ का कर्ज रह ही जायेगा. सरकार के आंकड़ों के अनुसार, गैर कर सहित अन्य स्त्रोतों से 69130 करोड़ मिलने का अनुमान लगाया है. अगर इसे भी मान लिया जाये, तो भी 16104 करोड़ का कर्ज रह ही जायेगा.राज्य कर में भी 945.81 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. वित्तीय वर्ष 2014-15 में राज्य कर से 10349.81 करोड़ रुपये मिले थे.

राशि का मिलान भी नहीं

एजी ने कई बार सरकार से राशि के मिलान का आग्रह भी किया. लेकिन अफसरों के उदासीन रवैये के कारण अब तक राशि का मिलान नहीं हो पाया है. दूसरी तरफ राजस्व वसूली भी कम हो रही है. एसी-डीसी बिल की बाध्यता खत्म होने के कारण भी वित्तीय संकट गहरा रहा है. अब अफसर उपयोगिता प्रमाण पत्र में सिर्फ लिखकर दे देते हैं कि पैसा का उपयोग हो गया है. लेकिन इसका कोई सत्यापन नहीं हो पा रहा है.

जोड़-तोड़ का असर भी खजाने पर

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राज्य सरकार ने कई और नये प्रोजेक्ट भी लिए हैं. इसका असर खजाने पर भी पड़ रहा है. वहीं कई प्रोजेक्ट्स में जोड़-तोड़ और फिर से निर्माण के कारण प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ गया है. उदाहरण के लिए रांची में पहले चरण में सीवरेज-ड्रेनेज के लिए 360 करोड़ का कार्यादेश कानपुर की कंपनी ज्योति बिल्डटेक को मिला था. कंपनी को 54 करोड़ रुपये की अग्रिम और चार करोड़ का बिल भुगतान भी किया गया. 18 महीने के अंदर न तो प्रोजेक्ट पूरा हुआ और ना ही काम आगे बढ़ा. अब कंपनी कह रही है कि प्रोजेक्ट कॉस्ट 8 फीसदी और बढ़ाया जाये साथ ही मियाद भी बढ़ाई जाये. इसी तरह एक दर्जन से भी अधिक प्रोजेक्ट्स का कॉस्ट बढ़ गया है. इसकी तरह बिरसा स्मृति पार्क, टाइम स्कॉवयर के डिजाइन भी फिर से बदले गये.

इन प्रमुख प्रोजक्टों पर चल रहा है काम

योजना प्रोजेक्ट की लागत (करोड़ में)

  • रवींद्र भवन 155 करोड़
  • पथ विभाग(सड़क) 5000 करोड़
  • हाईकोर्ट 699 करोड़
  • स्मार्ट सिटी 3000 करोड़(लगभग)

किस कंपनी को कितने का घाटा

  • जेएआरडीसीएल – 0.14 करोड़
  • हजारीबाग-रांची एक्सप्रेसवे- 22.23 करोड़
  • जेआरआईपीएल – 28.61 करोड़
  • जेआईआईसीएल- 404.61 करोड़
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