रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और राज्य के वित्त एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा 20लाख करोड़ रुपये में बातें-बातें बड़ी है, ठोस कुछ ज्यादा नहीं है.
उन्होंने कहा कि एमएसएमई जो देश की जीडीपी में एक तिहाई योगदान देता है,उसमें पैकेज का 5 प्रतिशत भी नहीं दिया गया, इस क्षेत्र में 11 करोड़ लोग काम करते है और इस क्षेत्र की उपेक्षा की गयी.
उन्होंने कहा कि 20 करोड़ के पैकेज का हिसाब वित्तमंत्री ने नहीं दिया, बिल्डरों को छह महीने का समय देने का पैकेज यानी 20 लाख करोड़ में इस क्षेत्र की भी उपेक्षा की गयी है.
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन में से कटकर 12 प्रतिशत ईपीएफ में जमा होता है,उसे 10 प्रतिशत कर दिया गया और बताया जा रहा है कि अब कर्मचारी ज्यादा पैसा घर ले जा सकेगा. इसी तरह से आयकर दाखिल करने की तारीख बढ़ायी गयी और इसमें भी सरकार दावा कर रही है कि सरकार का पैसा लगा है.
इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा कि यह पैकेज मात्र झुनझुना है, नथिंग सब्सटांटियल यानी कुछ भी ठोस नहीं है. एमएसएमई के लिए जो घोषणा की गयी है, उन सबको जोड़ने से भी 1 लाख करोड़ नहीं होता है.
उन्होंने कहा कि बैंकों को लिक्विटिडटी देने की बात कही गयी,उसमें पार्टी का कहना है कि बैंकों के पास लिक्विडिटी की कमी नहीं है, तभी तो वे रिवर्स रेपो रेट के द्वारा 6 से 8 लाख करोड़ रुपये डेली आरबीआई में जमा कर रहे है.
उन्होंने कहा कि घोषणाओं का वैल्यू जोड़ा जाए, तो 6 लाख करोड़ ही मुश्किल से होता है, जिन लोगों ने नौकरियों ने खोयी है, उन्हें कोई पैसा देने की बात नहीं की गयी है.

