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राष्ट्रीय पोषण अभियान के जिला समन्यवक व परियोजना सहायक द्वारा किया गया पोषण वाटिका का निरीक्षण

by bnnbharat.com
September 30, 2020
in समाचार
राष्ट्रीय पोषण अभियान के जिला समन्यवक व परियोजना सहायक द्वारा किया गया पोषण वाटिका का निरीक्षण
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– पोषण वाटिका में उपलब्ध संसाधनों व लाभार्थियों को दी जा रही फायदों की जानकारी

– जिले के 2 प्रखंडों के 50 आंगनवाड़ी केन्द्रों पर उपलब्ध है पोषण वाटिका

– घर-घर जाकर शिशुओं के स्वास्थ्य व मिल रहे पोषण का भी किया निरीक्षण

पूर्णियां: स्वास्थ्य जीवन के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षित पोषण का लिया जाना बहुत जरूरी है. विशेष रूप से नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के लिए यह आवश्यक है कि वह सही पोषण युक्त खाद्य पदार्थों का उपयोग करे. लोगों को पोषण की जानकारी देने और उनसे होने वाले फायदों के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से पूरे देश में सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. पूरे माह में समेकित बाल विकास परियोजना के सभी अधिकारियों एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को पोषण सम्बंधित जानकारी दी जा रही है.

जिले में राष्ट्रीय पोषण अभियान की जिला समन्वयक निधि प्रिया व जिला परियोजना सहायक सुधांशु कुमार द्वारा भी नियमित रूप से क्षेत्रों में भ्रमण कर आयोजित गतिविधियों की जानकारी ली जा रही है. इसके साथ ही इनके द्वारा क्षेत्र भ्रमण कर लाभार्थियों से मिल रही पोषण सम्बन्धी जानकारी का निरीक्षण भी किया गया. क्षेत्र निरीक्षण में पोषण अधिकारियों के साथ सेक्टर 3 की महिला पर्यवेक्षिका मीना कुमारी, आंगनवाड़ी सेविका रूबी कुमारी, सहायिका सीमा कुमारी भी उपस्थित रही.

क्षेत्र भ्रमण कर लिया पोषण गतिविधियों की जानकारी :

पोषण माह में चल रही गतिविधियों और पोषण वाटिका का लोगों को मिल रही लाभ का निरीक्षण करने के लिए राष्ट्रीय पोषण अभियान की जिला समन्यवक निधि प्रिया व परियोजना सहायक सुधांशु कुमार द्वारा जलालगढ़ प्रखंड का निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने कथैली मध्य विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र संख्या- 40 में लगाये गए पोषण वाटिका की निगरानी की व उस क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों से पोषण वाटिका से मिल रहे लाभ की जानकारी भी ली.

इस दौरान निधि प्रिया ने कहा कि लोगों द्वारा  पोषण युक्ति खाद्य पदार्थों का उपयोग करने और इसकी जानकारी हर घर तक पहुँचे इसके आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पोषण वाटिका लगवाये गए हैं. इससे क्षेत्र में उपस्थित गर्भवती, धात्री महिलाओं के साथ शिशुओं को भी सही पौष्टिक आहार के खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो सकेंगे. इन पदार्थ का अपने खाने में उपयोग करने से उनमें कुपोषण की समस्या खत्म होगी और सभी महिला और शिशु स्वास्थ्य रह सकेंगे. क्षेत्र भ्रमण के दौरान जिला समन्वयक द्वारा अपने सामने क्षेत्र के शिशुओं के शरीर का वजन नाप व  स्वास्थ्य जांच भी करवाई गई.

2 प्रखंड के 50 केन्द्रों पर है पोषण वाटिका :

पोषण अभियान के जिला परियोजना सहायक सुधांशु कुमार ने बताया कि जिले में दो प्रखंड कसबा और जलालगढ़ है जहां के 25-25 आंगनवाड़ी केन्द्रों में पोषण वाटिका लगाई गई है. पोषण वाटिका में उत्पादन करने के लिए कृषि विभाग द्वारा सेविकाओं को अनाज व पौधों के बीज दिए जाते हैं. पौधों को नियमित पानी देने के लिए पम्पिंग सेट भी दिया गया है. पोषण वाटिका में किस प्रकार से अनाज व सब्जियां उगाई जा सके इसके लिए उन सभी आंगनवाड़ी सेविकाओं को प्रशिक्षित भी किया गया है.

सभी 50 चयनित केन्द्रों पर सेविकाएं पोषण वाटिका का संचालन कर रही है. पोषण वाटिका में उत्पादित खाद्य पदार्थों को सेविकाएं अपने क्षेत्र के गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं के घरों में देती है जिससे कि वह इन पौष्टिक तत्वों का अपने आहार में इस्तेमाल कर पोषण युक्त रह सके. हमारे द्वारा नियमित निरीक्षण कर इसका ध्यान रखा जाता है कि क्षेत्र के लोग पोषण वाटिका में उत्पादित वस्तुओं का लाभ ले रहे हैं.

विभिन्न अनाजों का होता है उत्पादन :

जलालगढ़ प्रखंड के सेक्टर 3 की आंगनवाड़ी सेविका रूबी कुमारी ने कहा कि पोषण वाटिका में बहुत तरह के अनाजों का उत्पादन किया जाता है जो पूरी तरह पौष्टिक होता है. इसमें सहजन, टमाटर, खीरा, पपीता, विभिन्न प्रकार के साग के साथ ही अन्य मौसमी सब्जियां भी उगाई जाती है. उगाए गए खाद्य पदार्थों का उपयोग गर्भवती, धात्री महिलाओं, शिशुओं के घर वालों आदि को दिया जाता है.

आंगनवाड़ी केंद्र में भी पोषाहार के लिए इन्ही पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है. पोषण वाटिका में उत्पादित खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह के खाद-यूरिया आदि का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. यह पूरी तरह ऑर्गेनिक होता है जो किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. सेविका रूबी कुमारी ने कहा कि हमारे द्वारा क्षेत्र के लोगों को भी अपने घर के पास ऐसी पोषण वाटिका का निर्माण करने और वहां पर खुद से उत्पादित ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों का उपयोग करने की सलाह दी जाती है. इससे लोगों को ऑर्गेनिक पौष्टिक आहार मिल सकेगा और लोग स्वास्थ्य रह सकेंगे.

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