आधी सजा पूरी होने का हवाला देकर दाखिल की गयी है कि जमानत याचिका
रांची: हाईकोर्ट में शुक्रवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की अदालत में लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. अब इस मामले पर नौ अक्तूबर को अगली सुनवाई होगी. शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई के अधिवक्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि लालू यादव ने जिस मामले में बेल मांगी है उस मामले में सजा की आधी अवधि पूरी नहीं हुई है. हालांकि, लालू यादव के अधिवक्ता प्रभात कुमार के मुताबिक 9 अक्टूबर को लालू यादव को जमानत मिल सकती है.
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने लालू यादव की पैरवी अदालत में की. हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सीबीआई के अधिवक्ता के द्वारा अदालत से लालू को जमानत नहीं देने की दलील की गई, वहीं बचाव पक्ष यानी लालू यादव की तरफ से कारावास की अवधि एवं स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत मंजूर किये जाने का आग्रह किया गया. दोनों पक्षों की बहस और दलील सुनने के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिये 4 सप्ताह बाद की तारीख मुकर्रर की है.
बताते चलें कि अरबों रुपये के बहुचर्चित चारा घोटाले के तीन मामलों में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव की ओर से चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी मामले में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा दिये गये फैसले को चुनौती दी गयी है, साथ ही सजा की आधी पूरी होने पर जमानत देने का आग्रह किया गया. चारा घोटाले मामले में चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े मामले में लालू प्रसाद यादव को सीबीआई की विशेष अदालत ने पांच वर्ष की सजा सुनायी है, इस मामले में आधी सजा पूरी होने और अपनी उम्र तथा विभिन्न बीमारियों का हवाला देकर जमानत याचिका दाखिल की गयी है.
आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद को चारा घोटाले के एक अन्य मामले में जमानत पहले ही मिल चुकी है और चाईबासा कोषागार से जमानत मिलने के बाद भी जेल से उनके बाहर निकलने की राह पूरी तरह से साफ नहीं होगी. चारा घोटाले के तीसरे मामले में भी सजायाफ्ता लालू प्रसाद को जमानत के लिए अर्जी दाखिल करनी होगी.
गौरतलब है कि आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पिछले दो साल नौ महीने से अधिक से रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में बंद है. इस दौरान एक बार उन्हें बीमारी की वजह से रांची से बाहर इलाज कराने की अनुमति मिली थी, वहीं बेटे की शादी में भी कुछ दिनों के लिए पैरोल पर लालू प्रसाद को राहत मिली थी.
गौरतलब है कि हाईकोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई के अधिवक्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता की बीमारी का हवाला देते हुए समय मांग लिया गया था.

