रांची : कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख द्वारा विभागीय तबादले को लेकर लिये गए फैसले का भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने निंदा किया है. इस सम्बंध में पार्टी की ओर बयान जारी करते हुए राज्य कार्यकारिणी सदस्य अजय कुमार सिंह ने कहा है कि कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभागों में माफिया व कॉकस का राज चल रहा है, जो अपने हित के खातिर झारखंड कार्य पालिका नियमावली को धत्ता बताये हुए है और वर्षों से यहां जमे हुए हैं.
मालूम हो कि कई प्रमंडलों/जिलों/प्रखंड़ों में इस विभाग के कई राजपत्रित व अराजपत्रित पदाधिकारियों का पद रिक्त है. पदरिक्त होने के कारण कृषि, पशुपालन व सहकारिता संबधी कई कार्य सही ढंग से नहीं हो रहे हैं.
पार्टी ने कहा है कि पिछली सरकार की तरह ही यह वर्तमान सरकार भी उसी गलती को दुहरा रही है. जिसके कारण, किसान, दलित-आदिवासी को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. यह इसलिए है कि एक ही पदाधिकारी कई काम कर रहे हैं.
पिछली सरकार के किसान, आदिवासी-दलित विरोधी रुख अपनाये हुए था, उस दौरान वास्तविक लाभुकों को लाभ देने बजाय बिचौलियों के द्वारा ही काम होते थे और विशेष लाभ पहुचाया जाता था। इसी कारण से प्रत्येक वर्ष स्थानांतरण हेतु स्थापना की बैठक की घोषणा तो होती थी। मगर या तो बैठक को रद्द कर दिया जाता था या फिर स्थानांतरण की सूची जारी कर उसे रदद् की गयी थी। इससे भ्रष्टाचार में लिप्त पदाधिकारियों और माफियाओं के चंगुल में विभाग को होने की आशंका बलवती होती है.
पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उक्त नियमावली की धारा 22 (5), जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि एक स्थान पर तीन साल से जमे कर्मचारियों/पदाधिकारियों के स्थानांतरण करने का निर्देश है, जिसका उल्लंघन विभागीय मंत्री द्वारा किया जा रहा है. पार्टी ने कहा कि इस तरह के फैसले से इन कर्मचारियों व पदाधिकारियों द्वारा ठीक ढंग से काम नहीं करते हैं और भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं.
पार्टी ने कहा है कि पूरे राज्य के प्रखंडों में इस विभाग के अधिकांश पदाधिकारियों के पद रिक्त हैं और कृषि विभाग द्वारा लागू होने वाले कार्यक्रमों व योजनाओं को ठीक ढंग से लाभुकों तक नहीं पहुंच पा रहा है. ऐसे में कृषि जिस पर राज्य की 80 प्रतिशत ग्रामीण जनता की आजीविका निर्भर है.
ऐसे में पार्टी ने सरकार से मांग करती है कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस के अपने संकल्प पर अपनी प्रतिबद्धता को कार्यरूप दे और तीन वर्षों से अधिक समय से जमे पदाधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल स्थानांतरण करे और झारखंड के आदिवासी-दलित और किसानों तक उचित लाभ दिलाये.

