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विश्व हाथी दिवस पर हाथी से जुड़े कई रोचक जानकारियां…

by bnnbharat.com
August 11, 2020
in Uncategorized
विश्व हाथी दिवस पर हाथी से जुड़े कई रोचक जानकारियां…
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मुंगेर: हाथियों की रक्षा और सम्मान करने और उनके सामने आने वाले खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्‍य से हर साल 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस मनाया जाता है. हाथी भले ही सबसे विशाल पशु है, लेकिन उसके सामने भी तमाम चुनौतियां आये दिन आती हैं, वो चाहे जंगली जानवरों की वजह से हों या फिर इंसानों से.

इसलिए, उनकी रक्षा के तरीकों का पता लगाने और हाथियों की रक्षा करना बेहद जरूरी है. साथ ही वर्षावनों की जैव विविधता को बनाए रखने में भी हाथ‍ियों की बड़ी भूमिका है.

12 अगस्त, 2012 को पहला अंतर्राष्ट्रीय हाथी दिवस मनाया गया. तब से, यह हर साल मनाया जाता है और यह दिन विशाल पशु हाथी के संरक्षण और उनकी देख रेख के लिए समर्पित है.

माइकल क्लार्क और पेट्रीसिया सिमा, कनाडा के दो फिल्म निर्माता और थाईलैंड में एलीफैंट रिइनोड्रोडक्शन फाउंडेशन के महासचिव सिवापॉर्न डारडरानंद ने 2011 में विश्व हाथी दिवस मनाने का फैसला किया. यह दिन लोगों को जंगली जानवरों, हाथियों के लिए बेहतर संरक्षण की आवश्यकता को समझने और हाथी दांत के अवैध अवैध शिकार को रोकने के उद्देश्‍य से मनाया जाता है.

हाथियों की जनसंख्या की बात करें तो प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक विश्व भर में 415,000 अफ्रीकन हाथी और 40,000-50,000  एशियन हाथी हैं.

भारत में हाथी का महत्व

दुनिया के लिए हाथी पृथ्वी पर सबसे विशाल जानवर है, लेकिन भारत में हाथी से लोगों की आस्था जुड़ी है. देश के कई राज्य हैं, जहां हाथी की पूजा की जाती है.

हिंदू धर्म में भगवान गणेश के हाथी रूप की ही पूजा की जाती है. कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में फैले पश्चिमी घाट, नीलगिरी और पूर्वी घाट को लगभग 10,000 हाथियों के साथ “एशिया के हाथी साम्राज्य” के रूप में जाना जाता है.

भारतीय हाथी झाड़ीदार जंगलों के पास रहते हैं, पर इनकी रिहायिश अन्य जगहों पर भी हो सकती है. ये स्वभाव से खानाबदोश होते हैं और एक स्थान पर कुछ दिनों से ज़्यादा नहीं रहते हैं.

ये जंगलों में रह सकते हैं पर खुले स्थान व घास वाली जगहों पर जाना पसंद करते हैं. भारतीय संस्कृति में हाथी का विशेष महत्व होने के बावजूद दुर्भाग्यवश इनकी संख्या घटती जा रही है.

विश्व वन्यजीव कोष और एशियाई हाथी विशेषज्ञ समूह द्वारा भारतीय हाथी को काफ़ी जगह प्राप्य लेकिन विलुप्तप्राय मानता है. पिछले दिनों कुछ ऐसी घटनायें सामने आयी जिसकी वजह से हाथी को लेकर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा हाथियों के संरक्षण को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किये हैं.

हाथी दिवस के उपलक्ष में भारत में हाथियों को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मनुष्‍यों तथा हाथियों के बीच संघर्ष की स्थिति को लेकर एक वेबसाइट जारी की है. जिसमें मानव हाथी संघर्ष को रोकने के लिए कई छोटे और दीर्घकालिक उपायों को लागू किया है.

 कैसे होती है इनकी गिनती

भारतीय हाथी की ही यदि बात करें तो यह मुख्यतः मध्य एवं दक्षिणी पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी एवं उत्तरी भारत तथा दक्षिणी प्रायद्वीपीय के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं. इन्‍हें भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में तथा ‘पशु-पक्षियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय में शामिल किया गया है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में हर पांच साल में हाथियों की गिनती होती है. इसके लिए चार अलग विधियों का इस्तेमाल पिछले वर्ष किया गया था. इसमें पहली विधि के अंतर्गत सभी राज्य सरकारों को आदेश दिया गया है कि वो डिजिटल मैप तैयार करें, ताकि जंगलों और उनसे बाहर मौजूद हाथियों की संख्या को दर्ज करना आसान की जा सके.

कुल मिलाकर सरकार की कोशिश है कि हाथियों की मौजूदगी को जियोग्राफिकल इंफोरमेशन सिस्टम पर भी लाया जा सके. इनकी गणनी की दूसरी विधि काफी पारंपरिक है.

इसके तहत, दो या तीन लोगों की एक टीम बनाई जाती है और उन्हें पांच वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र आवंटित कर दिया जाता है. ये टीमें हाथियों की उम्र और लिंग का रिकॉर्ड तैयार करती हैं और उनकी फोटो भी खींचती हैं.

एक विधि ये भी

इस विधि में गणना करने वाले हाथी के लीद से इसकी गिनती करते हैं. आपको बता दें मिली जानकारी के अनुसार एक हाथी एक दिन में 15-16 बार लीद करता है. इसके ज़रिए अंदाजा लगाया जाता है कि हाथियों का मूवमेंट कितना है और उनकी सेहत कैसी है.

आपको यहां पर ये भी बता दें कि हाथियों की उम्र का अंदाजा उनकी ऊंचाई से लगाया जाता है. अमूमन वयस्क नर हाथी की ऊंचाई आठ फीट तक और मादा हाथी की ऊंचाई सात फीट होती है.

हाथियों की गणना करने के चौथे तरीके में दो या तीन लोगों की टीमें इस विधि में भी बनाई जाती हैं. यह टीम पानी के स्रोत के पास तैनात रहती हैं. यहां भी हाथियों के उम्र और लिंग का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है.

यहां पर जानकारी के लिए यह भी बता दें कि आमतौर पर जन्म लेने वाले हाथियों में नर और मादा हाथियों की संख्या लगभग बराबर रहती है. लेकिन उम्र बढ़ने पर उनका अनुपात एक नर पर दो या तीन मादा का हो जाता है.

माना जाता है कि नर हाथी कमज़ोर माने जाते हैं. आमतौर पर हाथियों के झुंड को प्रतिवर्ष तकरीबन 350-500 वर्ग किलोमीटर पलायन करने के रूप में जाना जाता है.

भारत में हाथियों की संख्या

अगस्‍त 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हाथियों की कुल संख्या 27,312 दर्ज की गई. इसमें हाथियों की सर्वाधिक संख्या कर्नाटक में दर्ज की गई है, जहां 6049 हाथी थे, इसके बाद असम 5719 हाथियों के बाद दूसरे और केरल जहां 3054 हाथी मिले तीसरे स्‍थान पर रहा.

हाथी गलियारे

भारत में हाथियों के संरक्षण और इनकी संख्‍या बढ़ाने के लिये हाथी गलियारे का निर्माण किया गया. भारत में इस तरह के करीब 101 गलियारे हैं जिनमें से सबसे अधिक गलियारे पश्चिम बंगाल में स्थित हैं.

झारखंड राज्य में हाथी राष्ट्रीय पशु घोषित है, लेकिन राज्य में भी हाथियों की संख्या में कमी आयी है. साल 2017 में हाथियों के संरक्षण के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान ‘गज यात्रा’ को लांच किया गया. जिसमें  हाथियों की बहुलता वाले 12 राज्यों को शामिल किया गया था.

 वर्तमान में अवैध रूप से हाथियों के दांत के तस्करी से हाथियों की संख्या कम हो रही है

अक्सर हाथियों की दांत के लिए अवैध रूप से इनका शिकार हो रहा है.अब तक का सबसे लंबा हाथी दांत 138 इंच का दर्ज हुआ है.जिसका वजन लगभग 142 किलोग्राम था.

हाथियों के दांत की कीमत बहुत ज्यादा होती है. विदेशी बाजार में भी हाथी दांत की काफी मांग रहती है. इनके दातों का प्रयोग साज-सजावट की कीमती चीजों को बनाने से लेकर शक्ति वर्धक दवाओं में भी इस्तेमाल किया जाता है. इसी का फायदा उठाने के लिए शिकारी इनका धड़ल्ले से शिकार कर रहे हैं.

हाथी से जुड़े कुछ रोचक जानकारी

 

-हाथी की सामान्य आयु 70 तक वर्ष होती है.

 

-हाथी दुनिया की सबसे बुद्धिमान प्रजातियों में से एक हैं. वे भावनात्मक रूप से भी काफी परिपूर्ण होते हैं किसी करीबी की मृत्यु हो जाने पर उन्हें उदास या रोते हुए भी देखा गया है.

 

-हाथी शाकाहारी होते हैं और अपना अधिकतर समय खाना खाने में बिता देते हैं.

 

-5 किलोग्राम से अधिक वज़न का हाथी का मस्तिष्क (दिमाग) किसी भी स्थलीय जानवर की तुलना में बड़ा होता है.

 

-हाथी कई प्रकार के व्यवहार प्रदर्शित करते हैं- इनमें दुःख, सीखना, मातृत्व, अनुकरण (मिमिक्री या नक़ल करना), कला, खेल, हास्य, परोपकारिता, उपकरणों का उपयोग, करुणा और सहयोग इत्यादि भावनाएं शामिल हैं.

– हाथी स्पर्श,दृष्टि,गंध और ध्वनि से संवाद करते हैं

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