राहुल मेहता,
रांची: रात कितनी भी काली और डरावनी हो उसका अंत जरूर होता है. किसी ऋतु में रात छोटी होती है तो कभी रात लंबी. लेकिन यक्ष स्थाई नहीं होती. कोरोना का भी अंत होगा और हम सभी पुनः एक बार खुली सड़कों पर बिना किसी चिंता और भय के विचरण कर पायेंगे.
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लेकिन कभी-कभी लंबी रात के बाद सवेरा कोहरा भरा होता है. सूर्य की किरण भी नजर नहीं आती. क्या कोरोना के बाद आने वाला कल ऐसा ही होगा? क्या सवेरा होने के बावजूद घना कोहरा रूपी समस्या बरकरार रहेगी? हम नहीं जानते, परंतु अंदाज अवश्य लगाया जा सकता है.
उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव
वैश्विक महामारी कोरोना के कारण अनेक आवश्यक सामग्रियों का उत्पादन बंद है. स्थिति सामान्य होने के बाद कुछ दिनों में इनका उत्पादन प्रारंभ हो सकता है. परंतु फसल चक्र हमारे नियंत्रण में नहीं. जो बीज अभी बोए नहीं गए उसकी फसल चाह कर भी कुछ दिनों में तैयार नहीं हो सकती.
कपड़ा उद्योग पर दुष्प्रभाव
खाद्यान्न के अलावा अप्रैल और मई में कपास की बुवाई होती है जो बुरी तरह से प्रभावित हो रही है. बुवाई लगभग ना के बराबर हुई है. आने वाले समय में पहले से मंदी की मार झेल रहे कपड़ा उद्योग के लिए यह अलग संकट पैदा करेगा.
मानव श्रम की समस्या
देश हो या विदेश सभी जगह से मानव श्रम पलायन कर अपने गांव को लौट गए हैं. कितने लोग वापस लौटेंगे यह तय नहीं, कब लौटेंगे यह भी तय नहीं. मांग एवं आपूर्ति रोजगार भत्ता को भी प्रभावित करेगी. एक संभावना है कि मानव संसाधन की कमी के कारण रोजगार भत्ता बढ़ेंगे तो दूसरी संभावना है कि मजबूरी में मजदूर कम दर पर भी काम करने को बाध्य होंगे. स्थिति क्या होगी यह भविष्य के गर्भ में छिपा है लेकिन दोनों स्थिति समस्या जरूर उत्पन्न करेगी.
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खराब होती तैयार फसल
इससे भी विकराल समस्या गेहूं की उपज की होने वाली है. खेतों में गेहूं के फसल लहलहा रहे हैं और किसान उन्हें देखकर खुश होने के बजाय खून के आंसू रो रहे हैं क्योंकि वे अपनी तैयार फसल को खेतों में ही मिट्टी में मिल जाने को देखने को बाध्य हैं. मजदूरों की अनुपलब्धता के कारण वे फसल काट नहीं पा रहे हैं. कहीं-कहीं हार्वेस्टर हैं तो उसे चलाने वाले विशेषज्ञ नहीं हैं. परिणाम स्वरूप आने वाले दिनों में गेहूं की कमी होगी. उपलब्ध स्टॉक है पर उसका मूल्य अत्यधिक बढ़ जाएगा. आर्थिक बोझ से दबे किसान अगली महत्वपूर्ण फसल धान की खेती कर पाएंगे या नहीं इस पर भी संशय का काला बादल मंडराने लगा है.
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किसानों के लिए विशेष व्यवस्था की जरूरत
कुछ समस्याओं का निराकरण हमारे बस में होता है. इन समस्या का समाधान भी बहुत हद तक हमारे वश में है. यदि अभी त्वरित कार्रवाई कर किसानों के लिए विशेष पास जारी किया जाए और गेहूं के फसल की हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की जाए तो इस संकट का कुछ हद तक समाधान संभव है. यदि पेट्रोल पंप खुले रह सकते हैं तो विशेष व्यवस्था में किसान भी अपनी तैयार फसल को बर्बाद होने से बचा सकते हैं.

