रांची: झारखंड में मिलावटी खाद्य पदार्थों के गोरखधंधे में लगे लोगों पर अब लगाम लगाना मुश्किल होगा. क्योंकि NABL ने राज्य के इकलौते स्टेट फूड लैबोरेटरी (State Food Lab) में खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच पर रोक लगा दी है. लैब अपडेट नहीं होने के चलते यह रोक लगाई गई है.
इस कारण अब राज्य में मिलावटी खाद्य पदार्थों की सैम्पल जांच नहीं हो सकेगी. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अनुसार फूड टेस्टिंग लैब को NABL से मान्यता प्राप्त होना जरूरी है. लेकिन झारखंड की लैब 2020 तक अपग्रेड नहीं हो सकी. इसलिए NABL ने सैंपलों की जांच करने पर रोक लगा दी.
राज्य खाद्य विश्लेषक और स्टेट फ़ूड लैबोरेटरी के प्रमुख चतुर्भुज मीणा कहते हैं कि 2006 से स्टेट लैब चल रही थी. इसे 2011 तक NABL के मानक के अनुसार विकसित हो जाना चाहिए था. NABL ने औपबंधिक मान्यता दे रखी थी, जिसे समाप्त कर दिया गया. इसके चलते अब इस लैब में होने वाली जांच की कोई लीगल मान्यता नहीं रह गई है.
आपको बता दें कि स्टेट फूड लैब में हर साल 1200 से ज्यादा सैम्पल की जांच होती थी, जिसमें से 40% सैम्पल में मिलावट मिलती थी. यहां की रिपोर्ट के बाद कानूनी कार्रवाई की जाती थी. लेकिन अब जबकि लैब की मान्यता ही रद्द हो गई है, ये सारे काम नहीं हो सकेंगे. इससे मिलावट का कारोबार करने वालों पर नकेल कसना भी मुश्किल होगा. इसे विभागीय अधिकारियों की लेट लतीफी कहें या काम में लापरवाही कि सितंबर 2019 में ही लैब को अपग्रेड करने की मांग के बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. आखिरकार NABL ने जांच करने पर रोक लगा दी.
क्या होगा नुकसान
– स्टेट फ़ूड लेबोरेटरी की मान्यता रद्द होने के बाद अब इस प्रयोगशाला में खाने के सामान में किसी भी तरह की मिलावट की जांच नहीं हो पाएगी.
– NABL की रोक के बाद अब अगर जांच भी की जाती है तो उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी.
– लीगल वैलिडिटी नहीं रहने से मिलावटी खाद्य पदार्थों के कारोबार पर लगाम लगाना होगा मुश्किल.
– हर साल औसतन 1200 जांच सैम्पल में से करीब 500 में मिलावट पाया जाता रहा है.
– अति आवश्यक होने पर राज्य के बाहर फ़ूड सैम्पल भेजे जाने से बढ़ेगा वित्तीय बोझ.

