आज विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इन्हीं प्राकृतिक संसाधनों का बेहद जरूरी हिस्सा हैं पेड़-पौधे और जंगल। जंगलों की घटती संख्या के चलते, इनके संरक्षण पर जोर देना अब और भी जरूरी होता जा रहा है। एक पेड़ केवल छांव और ऑक्सीजन ही नहीं देता, इसकी कीमत इससे कहीं ज्यादा होती है। एक पेड़ की आर्थिक कीमत कितनी होती है, यह जानने के शुरुआती प्रयास भारत में ही हुए थे। 1979 में कलकत्ता यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. तारक मोहन दास ने एक अध्ययन किया था, जिसमें उन्होंने एक पेड़ की कीमत बताई थी।
एक पेड़ अपने 50 साल के जीवन में 2 लाख डॉलर (1979 की दर) की सेवाएं देता है। इन सेवाओं में ऑक्सीजन का उत्सर्जन, भूक्षरण रोकने, मिट्टी उर्वरक बनाने, पानी रिसायकल करने और हवा शुद्ध करने जैसी सेवाएं शामिल हैं। अगर 1979 की कीमत की महंगाई दर को ध्यान में रखते हुए गणना की जाए तो आज एक पेड़ की सेवाओं की कीमत करीब 5 करोड़ रुपए होती है। एक अन्य अध्ययन दिल्ली के एक एनजीओ दिल्ली ग्रीन्स ने 2013 में किया था। इसके मुताबिक एक स्वस्थ पेड़ साल में जितनी ऑक्सीजन देता है, अगर उसे खरीदने जाएं तो कीमत 30 लाख रुपए से भी ज्यादा होगी। यूं तो एक-एक पेड़ अमूल्य है, लेकिन यह आंकड़े यह तो बताते ही हैं कि पेड़ लगाने का हमारा प्रयास कितना महत्वपूर्ण होता है।
एक पेड़ हमारे लिए क्या-क्या करता है
- तापमान नियंत्रित करता है, CO2 कम करता है: पेड़ किसी इलाके का तापमान 1 से 5 डिग्री तक कम कर सकते हैं। सालभर में एक पेड़ 22 किग्रा तक कार्बन-डायऑक्साइड सोख सकता है।
- हर साल 100 किग्रा ऑक्सीजन देता है: एक पेड़ एक साल में 100 किग्रा तक ऑक्सीजन देता है। एक व्यक्ति को सालभर में 740 किग्रा ऑक्सीजन की जरूरत होती है।
- बारिश करवाता है, ग्राउंडवाटर बढ़ाता है: एक पेड़ की मदद से सालाना 3500 लीटर पानी बरस सकता है। हर पेड़ करीब 3700 लीटर पानी रोककर जमीन में पहुंचाता है। इससे ग्राउंडवाटर बढ़ता है।
- हवा फिल्टर कर फेफड़ों को बचाता है: एक पेड़ 6 फीसदी तक स्मॉग (धुआं और फॉग) कम करता है। पूर्ण विकसित पेड़ प्रदूषित हवा से 108 किलोग्राम तक छोटे कण और गैस सोख सकता हैै।
- पानी स्टोर करता है, शहरों में बाढ़ रोकता है: पानी स्टोर करता है, वातावरण में पानी बनाए रखता है। इससे सूखे की आशंका कम होती है। शहरों में 530 लीटर पानी को नालियों में जाने से रोककर बाढ़ से बचाता है।
- शांति और बचत के साथ सुकून भी: घर के आसपास सही जगह पेड़ लगाने पर एसी की जरूरत 30% कम होती है। इससे 20-50% बिजली बच सकती है। अंदर आने वाला शोर 50% तक कम कर सकता है।
- मिट्टी से जहरीले पदार्थ सोखता है: एक पेड़ मिट्टी से करीब 80 किलोग्राम पारा, लीथियम, लेड आदि जैसी जहरीली धातुओं को सोखता है। इससे मिट्टी ज्यादा उर्वरक और खेती लायक बनती है।
- जैव विविधता बचाने में मदद करता है: एक पेड़ से पक्षियों की 80 प्रजाति तक बच सकती हैं। देश के 84 जानवर विलुप्त हो रहे जानवरों की रेड लिस्ट में हैं। इसमें यहां दिख रहे घड़ियाल, जेपोर छिपकली, उड़न गिलहरी भी हैं।
दुनिया में इन कारणों से सबसे ज्यादा पेड़ काटे जा रहे हैं…
- 23% जंगल में लगनी वाली आग की वजह से
- 26% लकड़ी से बनने वाले उत्पादों के लिए
- 0.6% शहरीकरण करने के लिए
- 27% खेती की जमीन बढ़ाने और खनन, तेल और गैस उत्पादन के लिए
- 24% स्थानांतरी कृषि (खेती हेतु खाली की गई जमीन, जिसे बाद में छोड़ दिया)
- 17200 करोड़ वर्गफीट में फैले पेड़ काटे जा चुके हैं भारत में, पिछले 18 सालों में। यानी करीब 125 करोड़ पेड़ काटे गए। (गणना प्रति वर्गकिमी जंगल में 75000 पेड़ पर आधारित)
- 14000 करोड़ पेड़ लगाने की जरूरत है, देश के 33 फीसदी क्षेत्र में जंगल फैलाने के लिए। सरकार ने 33 फीसदी का लक्ष्य रखा है। देश में अभी 21.54% क्षेत्र में जंगल हैं।
पेड़ और बारिश का साइकिल: ज्यादा पेड़ यानी ज्यादा बारिश
- वाष्पीकरण: पानी से भाप बनने की प्रक्रिया। जल स्रोतों के साथ पेड़ों की पत्तियों से भी वाष्पन होता है। इससे हवा में नमी बढ़ती है।
- माॅनसून: भाप का ठंडी होकर पानी में बदलना। बड़े और घने पेड़ हवा की नमी को ज्यादा रोकते हैं, इससे ज्यादा बारिश होती है।
- वाष्पोत्सर्जन: पेड़ जितना पानी सोखता है, उतने का इस्तेमाल नहीं करता। पत्तियां अतिरिक्त पानी भाप के रूप में हवा में छोड़ती हैं।
- टपकन/रिसाव: पानी का रिसकर धरती में जाना। पेड़ तेज बारिश के पानी को बहने से रोकते हैं। इससे धरती में ज्यादा पानी जा पाता है।

