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स्वास्थ्य केंद्र में जल्द ही संचालित किया जाएगा न्यूट्रिशन सेंटर अति कुपोषित बच्चों के साथ माताओं के एनीमिया जांच एवं इलाज तथा मिलेगा पौष्टिक भोजन

by bnnbharat.com
January 23, 2021
in समाचार
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चाईबासा:- पश्चिमी सिंहभूम  अरवा राजकमल के द्वारा जानकारी दी गई कि झारखंड राज्य की महिला, बाल-विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की मंत्री एवं स्थानीय मनोहरपुर विधायिका, श्रीमती जोबा मांझी के मार्गदर्शन में एससीए मद से चाईबासा शहर के नजदीक अवस्थित बड़ा चीरु में कल्याण विभाग द्वारा निर्मित स्वास्थ्य केंद्र में कुपोषण के विरुद्ध बड़ी मुहिम का शुरुआत करते हुए जिला प्रशासन के द्वारा (न्यूट्रिशन सेंटर) पोषण केंद्र का संचालन यथासंभव फरवरी माह से प्रारंभ किया जाएगा तथा प्रारंभिक दौर में यह केंद्र 50 बेड का होगा जिसे आवश्यकतानुसार बढ़ाकर 100 बेड तक किया जाएगा तथा उक्त केंद्र पर जिले में चिन्हित 3,015 अति कुपोषित बच्चों का क्रमशः मुफ्त इलाज होगा तथा इलाजरत बच्चों के माता और यदि उनके और भी छोटे बच्चे जो कि कुपोषित नहीं भी हैं उन्हें भी वहां पर रहने एवं पौष्टिक भोजन की व्यवस्था सुलभ होगी और इस दौरान इन महिलाओं का भी एनीमिया जांच किया जाएगा और यदि वह एनीमिया से ग्रसित होंगी तो उनका भी वहां पर मुफ्त इलाज किया जाएगा.

इस संबंध में उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन के द्वारा पूर्व में भी कुपोषण के विरुद्ध कई इनोवेटिव पहल प्रारंभ करते हुए जिले के सदर अस्पताल सहित अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 60 बेड की उपलब्धता के साथ कुपोषण उपचार केंद्र संचालित किया गया है. उन्होंने कहा कि बेड की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए यदि 1 बच्चे के इलाज में 2 से 3 हफ्ते का औसत समय निर्धारित किया जाए तो औसतन 1 साल में 1,200 बच्चे से अधिक का इलाज संभव नहीं है. उक्त बातों को ध्यान में रखते हुए पोषण केंद्र का संचालन प्रारंभ किया जा रहा है जहां सर्वे के दौरान चिन्हित अति कुपोषित बच्चों को माँ के साथ लाकर उनका समग्र कुपोषण का इलाज शुरु किया जाएगा, जोकि जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी लाने का एक भरपूर प्रयास का आरंभ होगा. उन्होंने कहा कि अक्सर यह सूचना प्राप्त होती है की जिन महिलाओं को दो या तीन बच्चे रहते हैं वह अपने कुपोषित बच्चे का इलाज अस्पताल में रहकर नहीं कराना चाहते हैं. इसलिए इस केंद्र पर कुपोषित बच्चे के इलाज के दौरान उनकी माता एवं जो बच्चे कुपोषित नहीं रहेंगे उन सभी को रखने का व्यवस्था रहेगा, सभी को पौष्टिक भोजन दिया जाएगा और जितने दिन भी वहां पर बच्चे इलाजरत रहेंगे तो प्रतिदिन माता के हाथ में  130 नगद दिए जाने का भी प्रावधान होगा.

उपायुक्त ने बताया कि यह विशेष पहल अभी वर्तमान में जिले में कुपोषण उपचार केंद्र अंतर्गत उपलब्ध बेडों की संख्या को दोगुना करने के मकसद से किया जा रहा है तथा इस केंद्र का संचालन भी कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले चिकित्सक डॉ जगन्नाथ हेंब्रम के कुशल नेतृत्व में किया जाएगा तथा अपर उप समाहर्ता श्री जावेद हुसैन(भा.प्र.से)केंद्र के नोडल पदाधिकारी रहेंगे. इस पहल को यथाशीघ्र मूर्त रूप देने के लिए देर शाम को भवन का अवलोकन करते हुए आधारभूत संरचनाओं से संबंधित रूपरेखा तैयार किया गया है और जिला प्रशासन इस बार एक विशेष टारगेटेड पहल करना चाह रहा है कि जिले से कुपोषण को दूर किया जा सके. उपायुक्त ने बताया कि चिन्हित बच्चों का वेटिंग लिस्ट बनाकर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर इलाज किया जाएगा, जैसे ही किसी भी बेड बच्चे का इलाज पूर्ण होगा तो लिस्ट के आधार पर तुरंत दूसरे बच्चे को एडमिट कर इलाज प्रारंभ कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि जिले में संचालित कुपोषण उपचार केंद्र में बेड अधिभोग 90प्रतिशत है जिसे बढ़ाकर 100प्रतिशत किया जा रहा है.

उपायुक्त के द्वारा जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिला अंतर्गत सभी जिलावासियों सहित जनप्रतिनिधि-समाजसेवी तथा इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली आंगनवाड़ी सेविका- सहायिका से अपील करना चाहता हूं कि आप अपने आसपास रहने वाले कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को प्रेरित करें कि वह अपने नजदीक के कुपोषण उपचार केंद्र में या जिले के पोषण केंद्र में आएं और अपने बच्चे को स्वस्थ लेकर वापस जाएं. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण को बीमारी के रूप में नहीं देखा जाता है इसलिए माता-पिता कुपोषित बच्चों को भी अपने घर में ही रखते हैं लेकिन आप सभी से आग्रह है कि आप लोग कुपोषण उपचार केंद्र में आएं, वहां आप लोग को रहने की अच्छी व्यवस्था होगी आप सभी को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन दिया जाएगा. उन्होंने इस कार्य के लिए संबंधित विभागों-चिकित्सा पदाधिकारियों से आह्वान करते हुए कहा कि इस विशेष पहल में जिला प्रशासन का साथ दें और हम सभी पूर्व में भी एक टीम के रुप में आपसी सामंजस्य के साथ कई कार्यों में विजय हासिल कर चुके हैं.

झारखंड राज्य की महिला, बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग की मंत्री   जोबा माझी की उपस्थिति में सोनुआ प्रखंड अवस्थित पंसुवा डैम में केज कृषक गोष्ठी-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया. साथ ही विस्थापित लोगों के रोजगार सृजन हेतु केज कल्चर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से श्रीमती जोबा माझी के द्वारा केज में मछली का संचयन किया गया. इस अवसर पर जिला मत्स्य पदाधिकारी श्री जयंत रंजन, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी श्रीमती  काजल तिर्की एवं विभाग के अन्य पदाधिकारी तथा कर्मी उपस्थित रहे.

कार्यक्रम के अवसर पर मंत्री जोबा माझी ने कहा कि क्षेत्र के आम जनमानस को स्वरोजगार मुहैया कर स्वावलंबी बनाने हेतु राज्य सरकार दृढ़ संकल्पित है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आप सभी को लाभ पहुंचाने हेतु प्रयासरत है. आप सभी योजनाओं की सही जानकारी लेकर इसका लाभ लें. साथ ही उन्होंने कहा कि आप सभी जनमानस को स्वरोजगार उपलब्ध हो इस हेतु मत्स्य विभाग द्वारा पहल की गई है. जिसके तहत क्षेत्र के इस पंसुवा डैम में केज का निर्माण कर विभिन्न समूहों को उपलब्ध कराया गया है, जिसमें आज 4 लाख मत्स्य बीज छोड़े गये हैं. आप सभी मछली पालन के क्षेत्र में अच्छे कार्य करते हुए अपनी आय को बढ़ावा दें एवं योजनाओं का लाभ लें. उन्होंने कहा कि जिन समूहों को केज मिला है वह आत्मनिर्भर होकर मत्स्य पालन करें . किसानों को आवश्यक साधन नहीं होने पर मत्स्य पालन में बहुत सारी कठिनाइयां होती थीं जिसे देखते हुए अब विभाग की पहल से प्रत्येक समिति को आवश्यक साधन जैसे जाल, मत्स्य बीज, चारा सहित अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही हैं. उन्होंने किसान बंधुओं से कहा कि आप निडर होकर इस कार्य को करें. उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार के द्वारा और भी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी एवं केज की संख्या भी बढ़ाई जाएगी.

जोबा माझी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति योजनाओं एवं सरकारी लाभ से वंचित हो तो वह आंगनवाड़ी सेविका अथवा ग्राम के मुंडा को अपनी समस्या बताएं ताकि वह प्रखंड विकास पदाधिकारी के कार्यालय में जाकर आपकी समस्या को बताएंगे जिससे आपको योजनाओं का लाभ मिलेगा.

झारखंड सरकार की मंत्री कृषक गोष्ठी के तहत् मत्स्य पालकों से रूबरू हुईं एवं मत्स्य पालन से जुड़ने के उपरांत उनके जीवन शैली में क्या बदलाव आए एवं विभाग से जुड़ने के बाद उन्हें किन-किन चीजों से लाभान्वित किया गया उक्त सभी चीजों को मत्स्य कृषकों की जुबानी सुना गया और सभी लाभुकों को यह भी जानकारी दी गई कि आप मत्स्य पालन करें तथा और लाभुकों को भी इस योजना में जोड़ें ताकि इसका लाभ लेकर सभी अपना जीवन अच्छी तरह व्यतीत करें.

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