राँची:-इश्क़ में नायिका कलम बनने की चाहत रखती है
पूजा शकुंतला शुक्ला
चाहत
कलम जो होती
हमेशा नज़दीक रहती
कमीज़ की जेब होती
ठीकाना मेरा
धड़कने साफ सुनती
महसूस करती
दिल के तारों से होता
तआरुफ़ मेरा
जब रातें चाँदनी से
नहाई रहती
फैला होता हर ओर
जब जिक्र मेरा
छत पे बैठे
जब तुम नज़्म लिखते
तुम्हारे हाथों में
मैं ही तो पूरी रात होती
और तुम, मुझ से ही लिखते
अफ़साना मेरा……

