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रामगढ़ विधानसभा : आजसू के लिए कब्‍जा बरकरार रखना चुनौती

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रामगढ़: झारखंड चुनाव के तहत रामगढ़ विधानसभा सीट पर तीसरे चरण में चुनाव होना हैं. यहां मतदान 12 दिसंबर को होगा. इस सीट पर कब्‍जा बरकरार रखना आजसू पार्टी के लिए चुनौती होगी.

बीते डेढ़ दशक से इस सीट से आजसू पार्टी के चंद्रप्रकाश चौधरी ही जीतते रहे हैं. आजसू के लिए सबसे सुरक्षित सीट यही मानी जा रही है. हालांकि सांसद बन जाने के बाद इस सीट से चंद्रप्रकाश की पत्‍नी खड़ी है.

इस चुनाव में भाजपा ने भी अपना उम्‍मीदवार खड़ा किया है. गठबंधन के तहत कांग्रेस ने अपना प्रत्‍याशी यहां से उतारा है. इस चुनाव में हर दल आजसू से यह सीट झटकने में लगा है.

ये हैं उम्‍मीदवार-

आजसू पार्टी से सुनीता चौधरी, भाजपा से रणंजय कुमार, जदयू से सुदीप कुमार सिंह, झाविमो से मो0 आरिफ, अहमद कुरैशी, कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी ममता देवी.

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ये रहा है समीकरण-

1951 से 1967 तक रामगढ़ राज परिवार का सदस्य या उनकी पार्टी के उम्मीदवार ही जीतते थे. रामगढ़ राज परिवार के प्रभाव को 1969 के चुनाव बोदू लाल अग्रवाल ने तोड़ा था.

वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और राज परिवार के प्रत्याशी को हरा दिया. हालांकि बोदूलाल दो साल ही विधायक रहे सके.

1972 के चुनाव में वह भाकपा के मजरूल हसन खान से हार गये. खान जेल में रह कर चुनाव लड़े और जीते थे. चुनाव जीतने के बाद उनको रिहा किया गया. वह शपथ लेने पटना गये. शपथ लेने से पहले ही पटना विधायक क्लब में गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गयी थी. फिर उप चुनाव में मजरूल हसन खान की पत्नी सइदुन निशा विधायक चुनी.

1977 में जनता पार्टी के विश्वनाथ चौधरी जीते. 1980 में झामुमो के अर्जुन राम जीते. 1985 में जमुना प्रसाद शर्मा जीते. 1990 में झामुमो के अर्जुन राम विधायक बनें. 1995 में भाजपा के शंकर चौधरी चुनाव जीते.

2000 में सीपीआई के साबिर अहमद कुरैशी (भेड़ा सिंह) जीते. 2001 में उनकी मृत्यु हो गयी. फिर तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी फरवरी 2001 के उपचुनाव में जीते. 2005 से 2014 तक आजसू के चंद्रप्रकाश चौधरी इस सीट से जीतते रहे.

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