रांची: आपदा को अवसर में बदलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का मंत्र दिया है. प्रधानमंत्री के इस संदेश को धीरे-धीरे देश की जनता आत्मसात कर रही है. रांची के एक युवा उद्यमी भी आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ा रहे हैं और दूसरों के लिए भी जॉब क्रिएटर बन रहे हैं.
कोरोना संक्रमण काल के दौरान उपजे आर्थिक संकट ने भी रांची के युवा उद्यमी योगेश अग्रवाल के हौसलों को पस्त नहीं कर पाई. हाल ही में अनलॉक के दौरान योगेश ने पॉप स्टिक की एक यूनिट की शुरुआत की. इस यूनिट के माध्यम से इन्हें फायदा तो हो ही रहा है, 5 से 6 श्रमिकों के लिए वे रोजगार दाता भी बन गए हैं.
योगेश का मानना है कि मोमबत्ती निर्माण, अगरबत्ती, फिनायल और पापड़ निर्माण जैसे स्वरोजगार के कई ऐसे माध्यम है जिन्हें कम पूंजी के साथ शुरू किया जा सकता है. इनका कहना है कि नौकरी नहीं मिलने की स्थिति में युवाओं को स्वरोजगार के क्षेत्र में कदम बढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से वह दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं.
योगेश अग्रवाल के प्लांट में काम कर रहे लातेहार जिले के बिपिन उराव और रांची के संदीप को बहुत बड़ा सहारा मिल गया. इनका कहना है कि संक्रमण काल के दौरान इनके पास कोई रोजगार नहीं था. बाद में जब स्थितियां सामान्य होने लगी तब इन्हें बहुत आसानी से रांची में ही नौकरी मिल गई.
आत्मनिर्भर भारत और वोकल फोर लोकल की दिशा में आगे बढ़ने के लिए स्वरोजगार एक अच्छा माध्यम है. इसके जरिए उद्यमी को अपनी पूंजी और मेहनत के एवज में लाभ तो मिलता ही है दूसरों को भी रोजगार का मौका मिल जाता है.

